उत्तर प्रदेशराज्य

आगरा धर्मांतरण केस में दिल्ली कनेक्शन: बटला हाउस के डॉक्टर के पास मिले संदिग्ध रिकॉर्ड

आगरा धर्मांतरण रैकेट की जांच में दिल्ली के बटला हाउस और शाहीन बाग से जुड़े संदिग्ध कनेक्शन का खुलासा हुआ है। पुलिस पूछताछ में फंडिंग नेटवर्क और एक डॉक्टर के पास छिपे दस्तावेजों की बात सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस संगठित नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही हैं।

आगरा. आगरा के चर्चित कथित धर्मांतरण रैकेट की परतों को खोलते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। गिरफ़्तार आरोपियों से की गई कड़ी पूछताछ में इस नेटवर्क का संबंध दिल्ली के बटला हाउस और शाहीन बाग जैसे इलाकों से जुड़ता नजर आ रहा है। जांच में न केवल अवैध फंडिंग के सुराग मिले हैं, बल्कि यह भी सामने आया है कि गिरोह के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड एक डॉक्टर के ठिकाने पर छिपाकर रखे गए थे।

डॉक्टर के पास छिपे थे राज और दस्तावेज

पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि इस संगठित रैकेट से जुड़े बेहद संवेदनशील दस्तावेज और रिकॉर्ड दिल्ली के बटला हाउस स्थित एक डॉक्टर के पास सुरक्षित रखे गए थे। इसके अतिरिक्त, वित्तीय लेन-देन से संबंधित महत्वपूर्ण कागजात शाहीन बाग इलाके में होने की बात भी सामने आई है। इन जानकारियों के आधार पर पुलिस अब उन ठिकानों पर दबिश देने और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की धरपकड़ में जुट गई है।

फंडिंग नेटवर्क और ब्रेनवॉशिंग का खुलासा

अधिकारियों के अनुसार, तलमीज उर रहमान, परवेज अख्तर, जाविश उर्फ जतिन और मौलाना हसन जैसे आरोपियों से पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ है कि यह एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क है। इस रैकेट में केवल धर्मांतरण ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर ‘ब्रेनवॉशिंग’ और संदिग्ध स्रोतों से आ रही फंडिंग का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच एजेंसियां अब इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि इस पूरे खेल के लिए पैसा कहाँ से आ रहा था और इसके पीछे कौन सी बड़ी शक्तियां काम कर रही हैं।

14 आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक मुख्य सरगना अब्दुल रहमान और आयशा समेत कुल 14 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। हालांकि पुलिस ने आरोपियों की रिमांड अवधि बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए चार अन्य आरोपियों को भी जेल भेजने के आदेश दिए हैं। बरामद डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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