1986 से आज तक दिलों पर राज कर रहा ‘कर्म’ का गाना, सुभाष घई बोले- हर राष्ट्रीय अवसर पर गाया जाता है यह गीत
फिल्म कर्मा के सुपरहिट गाने 'दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए' पर निर्माता-निर्देशक सुभाष घई ने गर्व व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि यह कालजयी गीत आज भी देश के हर राष्ट्रीय समारोह की पहचान बना हुआ है।
फिल्म निर्माता और निर्देशक सुभाष घई ने 1986 की प्रसिद्ध फिल्म ‘कर्मा’ के आइकॉनिक देशभक्ति गीत ‘दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए’ की निरंतर लोकप्रियता पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि यह गाना आज भी हर राष्ट्रीय अवसर पर गाया जाता है। साथ ही, उन्होंने इस ऐतिहासिक गीत के संस्कृत संस्करण के प्रति मुक्ता आर्ट्स और दर्शकों के सकारात्मक प्रतिसाद के लिए आभार भी व्यक्त किया।
आइकॉनिक देशभक्ति गीत पर सुभाष घई ने व्यक्त की खुशी
भारतीय हिंदी सिनेमा में अनेक देशभक्ति गीत रचे गए हैं, लेकिन वर्ष 1986 में आई फिल्म ‘कर्मा’ का प्रसिद्ध गाना ‘दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए’ आज भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों की खास पहचान बना हुआ है। इस कालजयी गीत की निरंतर बनी लोकप्रियता को देखते हुए जाने-माने निर्माता और निर्देशक सुभाष घई ने अपनी प्रसन्नता और गर्व की अनुभूति साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर फिल्म का पोस्टर साझा करते हुए इस ऐतिहासिक गीत से जुड़े अपने अनुभवों को व्यक्त किया।
1986 में रिलीज हुए म्यूजिक एल्बम की स्मृतियां कीं साझा
सुभाष घई ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से बताया कि जब वर्ष 1986 में कर्मा का म्यूजिक एल्बम जारी किया गया था, तब उस पर फिल्म के कलाकारों के साथ-साथ संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और गीतकार आनंद बख्शी के हस्ताक्षर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह गाना समय के साथ भारत के हर राष्ट्रीय समारोह और गौरवपूर्ण अवसर का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। दशकों बाद भी इस गीत का जादू और राष्ट्रप्रेम की भावना उसी तरह जीवंत है।
यूट्यूब पर पसंद किया जा रहा है गाने का संस्कृत संस्करण
मुक्ता आर्ट्स द्वारा इस प्रसिद्ध गीत को एक नया रूप प्रदान करते हुए संस्कृत भाषा में भी जारी किया गया था। इस नए संस्करण को मूल गीत की गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने ही अपनी सुरीली आवाज दी है। सुभाष घई ने बताया कि यूट्यूब पर इस संस्कृत संस्करण को दर्शकों और संगीत प्रेमियों द्वारा बहुत सराहा जा रहा है। इस प्रयोग की सफलता पर उन्होंने कहा कि मुक्ता आर्ट्स परिवार को गर्व है कि भारतीय संस्कृति की पौराणिक भाषा में इस राष्ट्रीय गीत को एक नई पहचान मिली है।
कालजयी रचना का मूल और नया स्वरूप
मूल रूप से 1986 में रिलीज हुई फिल्म ‘कर्मा’ के इस हिंदी गीत का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था, जबकि इसके अमर बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे। इस देशभक्ति गीत को मोहम्मद अजीज और कविता कृष्णमूर्ति ने अपनी आवाज से अमर बना दिया था। इसके पश्चात अगस्त 2023 में सुभाष घई की पहल पर इसका संस्कृत रूपांतरण लॉन्च किया गया, जिसे आज भी दर्शकों द्वारा निरंतर प्रेम और सम्मान मिल रहा है।




