मध्य प्रदेश

विधि शिक्षा पर बीसीआई का बड़ा फैसला: मध्य प्रदेश के लॉ कॉलेजों में संकाय और सुविधाओं की होगी सघन जांच

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने मध्य प्रदेश के लॉ कॉलेजों में फैकल्टी और संसाधनों की कमी पर सख्त रुख अपनाया है। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को छह सप्ताह में सभी विधि संस्थानों का भौतिक सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट भेजने का निर्देश मिला है। मानकों का पालन न करने वाले परिसरों की मान्यता रद्द होगी।

भोपाल. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने मध्य प्रदेश के लॉ कॉलेजों में गुणवत्ता सुधारने हेतु कड़ा कदम उठाया है। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के अंतर्गत आने वाले 20 से अधिक लॉ कॉलेजों में प्राचार्यों, प्रोफेसरों की नियुक्ति और बुनियादी ढांचे की जांच के लिए निरीक्षण दल गठित किए जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश के लॉ कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर बीसीआई का कड़ा रुख

भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में संचालित विभिन्न लॉ कॉलेजों में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्धारित मापदंडों का गंभीर उल्लंघन सामने आ रहा है। कई शैक्षणिक संस्थानों में स्वीकृत पदों के सापेक्ष असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसरों की भारी कमी बनी हुई है। आलम यह है कि अनेक परिसरों में स्थायी प्राचार्य तक नियुक्त नहीं किए गए हैं, जिससे विधि शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इस बदहाल स्थिति की शिकायतें दिल्ली स्थित मुख्यालय तक पहुंचने के बाद बीसीआई ने राज्य के विधि कॉलेजों का व्यापक सत्यापन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय करेगा 20 से अधिक कॉलेजों का भौतिक सत्यापन

बीसीआई के कड़े निर्देशों के अनुपालन में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लगभग 20 लॉ कॉलेजों की स्थिति खंगालने की योजना बनाई है। विश्वविद्यालय प्रशासन कॉलेज कोड 28 के तहत स्वीकृत पदों, वास्तविक नियुक्तियों और कार्यरत शिक्षकों की संख्या का गहन परीक्षण करेगा। इस अभियान के दौरान शिक्षकों की विषयवार योग्यता, सेवा शर्तें और दैनिक उपस्थिति का रिकॉर्ड भी जांचा जाएगा, ताकि फर्जी नियुक्तियों के खेल पर विराम लग सके।

विद्यार्थियों के भविष्य और विधि शिक्षा की साख का सवाल

इस संपूर्ण प्रक्रिया को केवल शिक्षकों की संख्या तक सीमित न मानकर विधि शिक्षा की प्रामाणिकता से जोड़ा जा रहा है। अगर कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन नहीं होगा, तो वहां से निकलने वाले विद्यार्थियों की भविष्य में अधिवक्ता के रूप में नामांकन पात्रता पर भी संकट आ सकता है। बीसीआई ने साफ कर दिया है कि किसी भी विश्वविद्यालय का दायित्व केवल शुरुआती संबद्धता देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संबद्ध संस्थानों का नियमित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक निरीक्षण करना भी अनिवार्य कर्तव्य है।

छह सप्ताह के भीतर सौंपनी होगी विस्तृत जांच रिपोर्ट

निरीक्षण के दौरान जिन परिसरों में पर्याप्त पुस्तकालय, मूट कोर्ट, लीगल एड क्लिनिक, नियमित कक्षाओं और फैकल्टी की कमी मिलेगी, उनके खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। बीसीआई ने पूरी जांच प्रक्रिया पूरी कर 6 सप्ताह की समय-सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अल्टीमेटम दिया है। इस डेडलाइन को ध्यान में रखते हुए बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने वरिष्ठ प्राध्यापकों की विशेष कमेटियां बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अनियमितता मिलने पर रद्द होगी लॉ कॉलेजों की मान्यता

जांच रिपोर्ट में गंभीर खामियां या अनियमिताएं पाए जाने पर संबंधित कॉलेजों की मान्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की सिफारिश की जाएगी। बीसीआई के अनुसार, विश्वविद्यालयों द्वारा बिना धरातली जांच के संबद्धता देने की लापरवाही के कारण पूर्व में अदालतों से भी फटकार सुननी पड़ी है। इसके अतिरिक्त, शाम के समय या वीकेंड पर अवैध रूप से चलाए जा रहे लॉ पाठ्यक्रमों को चिन्हित कर तुरंत बंद कराने का आदेश भी जारी किया गया है।

निरीक्षण टीमों का गठन और प्रशासनिक तैयारी

बार काउंसिल ऑफ इंडिया से प्राप्त आधिकारिक पत्र के आधार पर बीयू प्रशासन ने जमीनी स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. एसबी सिंह के मुताबिक, बीसीआई के पत्र के आलोक में विशेष निरीक्षण दलों का गठन किया जा रहा है। ये दल बिना किसी पूर्व सूचना के परिसरों का दौरा कर वास्तविक स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसे बीसीआई को भेजा जाएगा।

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