पूर्व सांसद विनायक राउत पर बहू के गंभीर आरोप, अंधविश्वास कानून के तहत दर्ज हुआ मामला
पूर्व सांसद विनायक राउत, उनके परिवार और दो तांत्रिकों के खिलाफ बहू की शिकायत पर अंधविश्वास निरोधी कानून के तहत मामला दर्ज हुआ है। पीड़िता ने मानसिक प्रताड़ना, जबरन धार्मिक अनुष्ठान और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिवसेना (यूबीटी) से जुड़े पूर्व सांसद विनायक राउत और उनके परिवार को लेकर नया विवाद सामने आया है। उनकी बहू की शिकायत के आधार पर पुलिस ने विनायक राउत, उनकी पत्नी, पार्षद बेटे गीतेश राउत तथा दो कथित तांत्रिकों के खिलाफ अंधविश्वास निरोधी कानून की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अंधविश्वास से जुड़े अनुष्ठानों के नाम पर जबरन गोमूत्र पिलाया गया, बाल उखाड़े गए और मानसिक प्रताड़ना दी गई।
सात वर्षों तक प्रताड़ना का आरोप
शिकायतकर्ता गिरिजा राउत का आरोप है कि विवाह के बाद से उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनका कहना है कि कई बार उन्हें कमरे में बंद रखा गया, भोजन और पानी से वंचित किया गया तथा संतान न होने का कारण बताकर कथित तांत्रिकों के पास ले जाया गया। उन्होंने दावा किया कि परिवार ने अंधविश्वास के आधार पर उनके साथ कई तरह की कथित धार्मिक और तांत्रिक गतिविधियां कराईं, जबकि उनके अनुसार चिकित्सीय समस्या उनके पति से जुड़ी थी। उनका यह भी कहना है कि परिवार के वरिष्ठ सदस्य होने के बावजूद विनायक राउत ने कभी उनका साथ नहीं दिया।
विनायक राउत ने आरोपों को बताया निराधार
पूर्व सांसद विनायक राउत ने अपने और परिवार पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मामला वैवाहिक विवाद से जुड़ा है और उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी बहू तलाक के साथ बड़ी आर्थिक मांग कर रही है, जिसमें करोड़ों रुपये, फ्लैट और कार की मांग शामिल है। उनका कहना है कि मांग पूरी नहीं होने पर परिवार को बदनाम करने के उद्देश्य से यह शिकायत दर्ज कराई गई।
पति के खिलाफ भी लगाए निजी आरोप
शिकायतकर्ता ने अपने पति पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विवाह के बाद से वैवाहिक संबंध सामान्य नहीं रहे और हनीमून के दौरान भी पति ने दूरी बनाए रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में विदेश प्रवास के दौरान भी पति का व्यवहार सामान्य नहीं था और वे उनसे बातचीत तक नहीं करते थे। गिरिजा ने यह भी दावा किया कि सार्वजनिक स्थानों पर उनका अपमान किया जाता था और उन्हें लगातार मानसिक दबाव में रखा जाता था। फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी पक्षों के बयान तथा उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।




