बिज़नेस

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध: बंधुआ मजदूरी जांच के बावजूद दवाइयों और स्मार्टफोन निर्यात को मिली सुरक्षा

अमेरिका ने धारा 301 जांच के तहत भारतीय वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया है, जो शुरुआती प्रस्ताव से कम है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, लगभग 45 प्रतिशत भारतीय निर्यात इस नए शुल्क के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त है।

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने शनिवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका द्वारा कथित बंधुआ मजदूरी प्रथाओं से जुड़ी धारा 301 जांच के अंतर्गत भारत को 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की सबसे निचली श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय द्वारा व्यापार अधिनियम 1974 के तहत वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के विरुद्ध अतिरिक्त शुल्क अधिरोपित करने संबंधी नई घोषणाएं जारी की गई हैं।

वैश्विक स्तर पर 60 अर्थव्यवस्थाओं की जांच और भारत का पक्ष

यह प्रशासनिक कार्रवाई भारत सहित दुनिया की 60 अर्थव्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली, नीतियों और श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात-निर्यात अनुपालन से संबंधित जांच के पश्चात अमल में लाई गई है। यद्यपि अमेरिकी प्रशासन ने शुरुआत में भारतीय उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत शुल्क आरोपित करने का खाका तैयार किया था, किंतु द्विपक्षीय वार्ताओं और प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के उपरांत इस दर को घटाकर 10 प्रतिशत निर्धारित किया गया।

निरंतर कूटनीतिक प्रयासों से मिला तुलनात्मक व्यापारिक लाभ

जांच प्रक्रिया के दौरान भारतीय प्रतिनिधियों ने व्यापक लिखित विवरणों, प्रत्यक्ष बैठकों और जन सुनवाई में भाग लेकर अपना पक्ष मजबूती से रखा। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इन सुदृढ़ कूटनीतिक प्रयासों का ही परिणाम है कि अंतिम शुल्क संरचना में भारत को न्यूनतम श्रेणी में स्थान मिला, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत बनी रहेगी।

जेनेरिक दवाएं और स्मार्टफोन अतिरिक्त शुल्क के दायरे से बाहर

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को भेजे जाने वाले भारतीय निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इस नए 10 प्रतिशत शुल्क से पूरी तरह अप्रभावित है। जेनेरिक दवाइयों, स्मार्टफोन और कई अन्य प्रमुख उत्पादों पर यह अतिरिक्त कर लागू नहीं होगा। इसके साथ ही धारा 232 के अंतर्गत आने वाले इस्पात, एल्युमिनियम और ऑटो पार्ट्स जैसे घटक भी इस नई दर की परिधि से मुक्त रहेंगे।

45 प्रतिशत भारतीय निर्यात सुरक्षित, शेष 55 प्रतिशत पर सीमित असर

विभिन्न छूट प्रणालियों के प्रभावी होने के कारण अमेरिका को होने वाले कुल भारतीय निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा अतिरिक्त कर बोझ से बच गया है। शेष 55 प्रतिशत निर्यात पर 10 प्रतिशत की दर से शुल्क लगेगा, किंतु जांच के दायरे में आई अन्य वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारतीय उत्पादों पर पड़ने वाला वित्तीय प्रभाव बेहद सीमित माना जा रहा है।

द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में जारी रहेंगी वार्ताएं

टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़ी विशेष व्यवस्थाओं पर अभी कार्यान्वयन होना शेष है और भारत इस संदर्भ में प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत बातचीत जारी रखेगा। सरकार आगामी दिनों में जारी संयुक्त बयानों के अनुरूप अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार तंत्र को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के लिए संकल्पबद्ध है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button