छत्तीसगढ़

खरीफ 2026: अल्प और अनियमित वर्षा से निपटने कृषि विभाग की तैयारी, किसानों के लिए जारी हुई विशेष एडवाइजरी

खरीफ 2026 में कम और अनियमित बारिश से निपटने के लिए कृषि विभाग ने आकस्मिक कार्ययोजना जारी की। जानिए किसानों के लिए फसल चयन, DSR तकनीक और जल संरक्षण के जरूरी उपाय।

रायपुर. खरीफ सीजन 2026 में संभावित अल्प एवं अनियमित वर्षा को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए आकस्मिक कार्ययोजना (Contingency Plan) जारी की है। विभाग ने कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों, जल संरक्षण तकनीकों और आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाने की सलाह दी है, ताकि सूखे जैसी स्थिति में भी किसानों की आय और फसल उत्पादन प्रभावित न हो।

कम बारिश में अपनाएं संरक्षण जुताई और DSR तकनीक

कृषि विभाग के अनुसार, कम वर्षा की स्थिति में किसानों को संरक्षण जुताई (Conservation Tillage) अपनानी चाहिए। इससे मिट्टी की नमी और उर्वरता बनी रहती है, कार्बनिक पदार्थों का संरक्षण होता है तथा भूमि की जलधारण क्षमता बढ़ती है।

धान की खेती करने वाले किसानों को डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है। इस पद्धति में रोपाई की आवश्यकता नहीं होती और 30 से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत की जा सकती है।

भूमि के अनुसार करें फसलों का चयन

कृषि विभाग ने किसानों को भूमि की प्रकृति और वर्षा की स्थिति के अनुसार फसलें चुनने की सलाह दी है।

  • हल्की भूमि: तिल, रामतिल और मूंगफली
  • भारी भूमि: शीघ्र एवं मध्यम अवधि की धान की किस्में
  • ऊपरी भूमि: मूंग, उड़द और अरहर की जल्द पकने वाली किस्में

इसके साथ ही कतार पद्धति से बुवाई, मिश्रित खेती और गोबर खाद या जैविक खाद के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया है।

कम पानी में तैयार होने वाली वैकल्पिक फसलें अपनाएं

यदि वर्षा सामान्य से कम होती है तो किसान कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता दें। इनमें शामिल हैं:

  • बाजरा
  • ज्वार
  • मक्का
  • मूंग
  • उड़द
  • अरहर
  • तिल
  • मूंगफली
  • तोरिया
  • रागी
  • कोदो
  • कुटकी (मिलेट)

ये फसलें कम पानी में अच्छी पैदावार देती हैं और अधिकांश 60 से 80 दिनों में तैयार हो जाती हैं। साथ ही दलहन और तिलहन फसलों की प्रधानमंत्री आशा योजना के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी भी की जाती है।

जल संरक्षण के लिए अपनाएं ये उपाय

कृषि विभाग ने वर्षा जल संरक्षण और सिंचाई प्रबंधन के लिए कई वैज्ञानिक उपाय सुझाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • नालों पर अस्थायी कच्चे बांध
  • खेत तालाब और डबरी निर्माण
  • टपक (ड्रिप) और स्प्रिंकलर सिंचाई
  • मल्चिंग तकनीक
  • ढलान के आड़े जुताई
  • कंटूर ट्रेंच और गेबियन संरचनाएं
  • स्टॉप डेम निर्माण
  • समय पर हाथ से निराई

इन उपायों से वर्षा जल का बेहतर संरक्षण होगा, भू-जल स्तर बढ़ेगा और संकट की स्थिति में जीवनरक्षक सिंचाई उपलब्ध हो सकेगी।

कृषि विभाग की किसानों से अपील

कृषि विभाग ने किसानों से मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक खेती और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने की अपील की है। विभाग का कहना है कि इन उपायों से कम वर्षा की स्थिति में भी फसल उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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