जंतर-मंतर पर ढोल-नगाड़ों की थाप: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर बनते ही गूंजा नारा ‘झुकती है दुनिया’
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने की घोषणा के साथ ही जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन एक बड़े उत्सव में बदल गया। लंबे समय से आंदोलन कर रहे युवाओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ इस फैसले का स्वागत किया।
नई दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अपने पद से हटने की खबर जैसे ही सामने आई, राजधानी के जंतर-मंतर पर लंबे समय से डटे प्रदर्शनकारियों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। हफ्तों से चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन का माहौल अचानक ढोल-नगाड़ों और विजय के नारों में बदल गया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके ने मुख्य मंच से इस फैसले की औपचारिक घोषणा की। इस ऐलान को सुनते ही पूरे मैदान में मौजूद युवाओं और समर्थकों ने एक-दूसरे को बधाई देकर अपनी खुशी व्यक्त की।
अभिजीत दीपके का बड़ा दावा: टूट गया ‘इस्तीफा न होने’ का भ्रम
जश्न के इस खुशनुमा माहौल के बीच अभिजीत दीपके ने मंच संभाला और वहां मौजूद विशाल जनसमूह को संबोधित किया। अपने भावुक और असरदार भाषण में उन्होंने इसे केवल एक नेता का हटना नहीं, बल्कि आम जनता और छात्रों के संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अक्सर यह कहा जाता था कि मौजूदा व्यवस्था किसी दबाव में झुकती नहीं है और न ही यहां इस्तीफों की कोई परंपरा रही है। हालांकि, इस आंदोलन ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।
झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए: एकता की ताकत का प्रदर्शन
अपने संबोधन के अंत में दीपके ने एक प्रसिद्ध कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि अगर इरादे बुलंद हों और मकसद सच्चा हो तो कोई भी व्यवस्था अडिग नहीं रह सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया झुकती है, बस उसे सही मायनों में झुकाने वाला चाहिए। जंतर-मंतर पर मौजूद हर व्यक्ति के चेहरे पर अपनी बात मनवाने की संतोषजनक मुस्कान स्पष्ट देखी जा सकती थी।




