भोजशाला विवाद: नमाज के लिए अलग स्थान तय करना प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती
धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। नमाज के लिए अलग खुले स्थान की व्यवस्था, सुरक्षा, तलाशी और कानूनी व्याख्या को लेकर हाईलेवल बैठक हुई। 5 अगस्त की सुनवाई से पहले अंतरिम व्यवस्था प्रशासन की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
धार. धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। आदेश के अनुपालन को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अदालत के निर्देशों के अनुरूप मुस्लिम पक्ष के लिए नमाज की व्यवस्था करना और परिसर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इसके साथ ही सुरक्षा, तलाशी व्यवस्था और सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नमाज के लिए अलग खुले स्थान की तलाश बनी चुनौती
भोजशाला में पहले प्रत्येक शुक्रवार दोपहर निर्धारित समय पर नमाज अदा की जाती थी, लेकिन हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के आदेश के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर से सटे अथवा उसके निकट किसी अलग खुले स्थान पर नमाज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर, हिंदू पक्ष ने भोजशाला के आसपास नमाज की अनुमति दिए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है। ऐसे में प्रशासन के सामने सभी पक्षों के हितों और न्यायालय के निर्देशों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।
हाईलेवल बैठक में कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर चर्चा
सुप्रीम कोर्ट का 14 जुलाई का आदेश प्राप्त होने के बाद कलेक्टर राजीव रंजन मीना, एसपी सचिन शर्मा, एएसपी विजय डावर, एसडीएम, तहसीलदार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में विस्तृत बैठक हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अदालत के निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन किया जाएगा। बैठक में नमाज के लिए अलग खुले स्थान, सुरक्षा व्यवस्था, तलाशी प्रक्रिया और आवागमन को सुचारु बनाए रखने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
आदेश के शब्दों की व्याख्या पर टिकी आगे की रणनीति
प्रशासन की आगे की कार्ययोजना सुप्रीम कोर्ट के आदेश में प्रयुक्त शब्दों की कानूनी व्याख्या पर आधारित होगी। आदेश में ‘अजेसेंट’ यानी परिसर से सटे स्थान और ‘नियर’ यानी निकट स्थित स्थान का उल्लेख किया गया है, लेकिन निकट की स्पष्ट दूरी तय नहीं की गई है। इसी कारण प्रशासन विधि विशेषज्ञों की राय लेकर ऐसा समाधान तैयार करने में जुटा है, जो अदालत की भावना और स्थानीय परिस्थितियों दोनों के अनुरूप हो। साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि दोनों पक्षों के आवागमन में किसी प्रकार की बाधा नहीं हो और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण बिना अनुमति किसी भी प्रकार का संरचनात्मक परिवर्तन न करे।
5 अगस्त की सुनवाई से पहले प्रशासन की अग्निपरीक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला मामले की अपीलों पर 5 अगस्त को अंतिम सुनवाई निर्धारित की है। हालांकि उसी दिन अंतिम निर्णय आना आवश्यक नहीं है, क्योंकि अदालत फैसला सुरक्षित भी रख सकती है या अगली तारीख तय कर सकती है। इससे पहले आने वाले शुक्रवारों पर नमाज की अंतरिम व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा साबित होंगे। ऐसे में जिला प्रशासन न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण और संतुलित व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार तैयारी कर रहा है।




