राहुल गांधी की बढ़ेगी मुश्किल? नेता प्रतिपक्ष पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी में भाजपा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पद से हटाने के लिए भाजपा संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। सांसद निशिकांत दुबे ने विदेश यात्राओं की एसआईटी जांच की मांग की है।

नई दिल्ली. संसदीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। झारखंड के गोड्डा क्षेत्र से प्रतिनिधि निशिकांत दुबे ने स्पष्ट किया है कि सत्ता पक्ष जल्द ही कांग्रेस नेता को विपक्ष के नेता पद से हटाने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है। उनका तर्क है कि वर्ष 2004 से 2026 के मध्य हुई उनकी सभी विदेशी यात्राओं की जवाबदेही निर्धारित करना अनिवार्य हो चुका है।
विदेश दौरों और कारोबारी संबंधों पर उठे गंभीर प्रश्न
सत्ता पक्ष के प्रतिनिधियों का आरोप है कि विदेश प्रवास के दौरान भारतीय नीतियों का प्रतिनिधित्व करने के स्थान पर देश के संवैधानिक ढांचे की आलोचना की जाती है। इन यात्राओं में वैश्विक कारोबारियों और संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों की उपस्थिति पर संदेह जताया गया है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2008 में चीन के साथ हुए पुराने समझौतों के विवरण सार्वजनिक न किए जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
विशेष जांच दल के गठन और कड़े कदम की मांग
संसदीय मर्यादाओं का हवाला देते हुए मांग की गई है कि पिछले दो दशकों के दौरान किए गए सभी विदेशी दौरों और गुप्त सहमतियों की निष्पक्ष समीक्षा के लिए विशेष जांच दल गठित किया जाए। सत्ता पक्ष का मानना है कि विदेशी मंचों पर दिए गए बयानों से देश की वैश्विक छवि प्रभावित होती है, इसलिए इस विषय पर कठोर प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए।
राजनीतिक टकराव और संसद में उठते तीखे सवाल
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब संसद के भीतर जनहित के मुद्दों, छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। गृह मंत्रालय से पूछे जा रहे तीखे सवालों के उत्तर में सत्ता पक्ष की ओर से यह पलटवार किया गया है, जिससे सदन के भीतर राजनीतिक गर्माहट काफी बढ़ गई है।
पूर्व में पेश किए गए प्रस्तावों से बढ़ा विवाद
यह पहला अवसर नहीं है जब कांग्रेस नेता के विरुद्ध इस प्रकार की कार्रवाई की मांग की गई है। वर्ष 2026 के आरंभिक सत्रों में भी नियमबद्ध प्रक्रियाओं के तहत सदन को गुमराह करने और राष्ट्र की साख को प्रभावित करने के आरोपों पर प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा चुके हैं, जिनमें सदस्यता रद्द करने संबंधी मांगें भी शामिल रही हैं।




