AI युग में बदलें पाठ्यक्रम, विकसित भारत 2047 के लिए आईटी उद्योग को अश्विनी वैष्णव का बड़ा संदेश
हैदराबाद में आयोजित संगोष्ठी में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विकसित भारत 2047 के लिए एआई, आईटी, सेमीकंडक्टर और उद्योग-शिक्षा साझेदारी की अहम भूमिका पर जोर दिया।
हैदराबाद. हैदराबाद में आयोजित एक संगोष्ठी में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तेजी से वैश्विक आईटी उद्योग का स्वरूप बदल रही है। ऐसे समय में लगातार सीखने, नवाचार अपनाने और बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने आईटी उद्योग से नई पीढ़ी के तकनीकी समाधान विकसित करने और भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी की जरूरत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र की बदलती मांगों को देखते हुए शैक्षणिक संस्थानों के पाठ्यक्रम को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी है। उन्होंने आईटी उद्योग से शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर ऐसे पाठ्यक्रम विकसित करने की अपील की, जो उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप हों। उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश की कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
उद्योग आधारित शिक्षा मॉडल को बताया सफल उदाहरण
संगोष्ठी के दौरान अश्विनी वैष्णव ने गति शक्ति विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए बताया कि उद्योगों के सहयोग से तैयार किए गए पाठ्यक्रम बेहतर रोजगार अवसर प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एयरबस के साथ साझेदारी में विकसित पाठ्यक्रम के कारण वहां से प्रशिक्षित इंजीनियरों को सीधे रोजगार मिल रहा है। इसी दिशा में आईटी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भारतीय शिक्षण संस्थानों में सेक्टर आधारित डेटा ट्रस्ट स्थापित करने का सुझाव दिया, जिसका स्वागत करते हुए उन्होंने आईआईटी हैदराबाद में पायलट परियोजना शुरू करने की संभावना जताई। इस पहल के तहत सुरक्षित भारतीय डेटासेट उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनका उपयोग स्टार्टअप, शोधकर्ता और उद्योग जिम्मेदारी के साथ कर सकेंगे।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बढ़ रही भारत की ताकत
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देशभर के 315 विश्वविद्यालयों को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन टूल्स से जोड़ा गया है, जिससे विद्यार्थी उद्योग मानकों के अनुरूप सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन डिजाइनों का निर्माण और परीक्षण देश की सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला में किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को संपूर्ण प्रक्रिया की समझ मिलती है। साथ ही उन्होंने बताया कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक के उत्पादन स्तर तक पहुंच चुका है और लगातार तेज गति से विस्तार कर रहा है। मोबाइल फोन देश का सबसे बड़ा व्यक्तिगत निर्यात उत्पाद बन चुका है, जो भारत के वैश्विक तकनीकी और विनिर्माण केंद्र के रूप में तेजी से उभरने का संकेत देता है।




