एयर इंडिया का बड़ा कदम: बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमानों में शुरू हुआ तकनीकी सुधार
एयर इंडिया अपने बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमानों के डोर असिस्ट हैंडल में सुधार कर रही है। अमेरिकी सुरक्षा निर्देश के बाद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण।

भारतीय विमानन कंपनी एयर इंडिया अपने बेड़े में शामिल कुछ बोइंग 787 ड्रीमलाइनर जहाजों में दरवाजों के सपोर्ट ब्रैकेट से जुड़ी एक तकनीकी कमी को दूर करने का कार्य कर रही है। यह कदम अमेरिकी नागरिक उड्डयन नियामक एजेंसी द्वारा जारी की गई सुरक्षा संबंधी हिदायतों के पश्चात उठाया जा रहा है। इस संबंध में आवश्यक जांच और सुधार की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
सुरक्षा निर्देश जारी होने की पृष्ठभूमि
अमेरिकी विमानन प्राधिकरण द्वारा इस माह के आरंभ में बोइंग के विभिन्न मॉडलों के संदर्भ में यह विशेष निर्देश जारी किया गया था। उड़ानों के प्रस्थान से पूर्व की जाने वाली नियमित जांच के दौरान विमान के दरवाजों में लगे हैंडल्स के ढीले होने अथवा अपनी जगह से हटने की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके पश्चात यह कदम उठाना अनिवार्य समझा गया।
संभावित जोखिम और नियामक की चेतावनी
विमानन नियामक के अनुसार, यदि दरवाजे का हैंडल पृथक हो जाता है, तो प्रस्थान या आगमन के समय द्वार खोलते समय यात्रियों, चालक दल के सदस्यों अथवा रखरखाव में लगे कर्मचारियों को शारीरिक चोट लगने का जोखिम उत्पन्न हो सकता है। इसी वजह से विमानन कंपनियों को इन विशिष्ट मॉडलों में त्वरित सुधार करने की हिदायत दी गई है।
एयर इंडिया के बेड़े की स्थिति
वर्तमान समय में एयर इंडिया के पास इस श्रेणी के पैंतीस ड्रीमलाइनर विमान सेवा में मौजूद हैं। इनमें से प्रभावित जहाजों की पहचान कर आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं ताकि उड़ानों के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा या सुरक्षा जोखिम से पूरी तरह बचा जा सके।
उड़ान संचालन पर असर और प्रगति
एयरलाइन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कंपनी इस सुरक्षा निर्देश से पूरी तरह अवगत है और इससे वर्तमान उड़ान सेवाओं अथवा यात्रियों की सुरक्षा पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा है। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार क्रमबद्ध तरीके से सुधार कार्य संचालित किया जा रहा है, तथा बेड़े के कई पुराने विमानों में यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न भी हो चुकी है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और विवरण
हालांकि, बेड़े के कुल कितने जहाजों में यह बदलाव किया जाना शेष है, इसका सटीक आंकड़ा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया और तकनीकी सुधार के संबंध में विमानन कंपनी अथवा निर्माणकर्ता संस्था की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है।




