मोदी कैबिनेट में महाफेरबदल: किसकी होगी छुट्टी और किसे मिलेगा इनाम? जानें संभावित चेहरे
नोट: माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल से हटाए जाने वाले दिग्गजों को राज्यपाल बनाया जा सकता है। आने वाले महीनों में कर्नाटक (थावरचंद गहलोत), मध्य प्रदेश (मंगूभाई पटेल) और उत्तराखंड (लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह) के राज्यपालों का कार्यकाल पूरा हो रहा है।
नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कैबिनेट में एक बार फिर बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। आगामी मॉनसून सत्र और अगले साल कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए मंत्रिमंडल में कई अहम बदलाव किए जाने की उम्मीद है। परफॉर्मेंस, क्षेत्रीय समीकरण और नए राजनीतिक चेहरों को साधने के लिए पीएम मोदी अपनी टीम में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि यह कैबिनेट विस्तार कब हो सकता है, किन दिग्गजों की छुट्टी होने की संभावना है और किसे नया मौका मिल सकता है।
कब हो सकता है कैबिनेट विस्तार?
संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई के आसपास शुरू होने की उम्मीद है। कैबिनेट विस्तार की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक गलियारों में दो तरह की चर्चाएं हैं:
- जुलाई का सस्पेंस या सितंबर का इंतजार: कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेरबदल मॉनसून सत्र से पहले जुलाई में ही हो सकता है। वहीं, कुछ सूत्रों का मानना है कि सरकार का पूरा फोकस फिलहाल आगामी सत्र में ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ और परिसीमन जैसे अहम बिलों को पास कराने पर है। चूंकि राज्यसभा-लोकसभा में सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है, इसलिए असंतोष से बचने के लिए फेरबदल को सितंबर-अक्टूबर तक भी टाला जा सकता है।
- पीएम मोदी का टाइट शेड्यूल: प्रधानमंत्री का कार्यक्रम काफी व्यस्त है। वे 1 से 3 जुलाई तक जापानी प्रधानमंत्री के दौरे में व्यस्त रहेंगे, 4 जुलाई को राजस्थान जाएंगे और 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड के दौरे पर रहेंगे। ऐसे में मॉनसून सत्र से पहले सिर्फ 5 जुलाई का ही दिन बचता है। हालांकि, इतिहास गवाह है कि 2021 में भी मॉनसून सत्र से ठीक पहले रातों-रात 36 नए मंत्रियों को शामिल कर बड़ा फेरबदल किया गया था।
किन मंत्रियों की कुर्सी पर है खतरा?
इस फेरबदल में मंत्रियों के कामकाज के परफॉर्मेंस को मुख्य आधार बनाया जाएगा, जिसकी समीक्षा 21 मई की बैठक में की जा चुकी है।
- नीट (NEET) विवाद का असर: नीट पेपर लीक और सीबीएसई के डिजिटल मार्किंग सिस्टम में हुई कथित अनियमितताओं के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भविष्य अधर में माना जा रहा है।
- उम्र का फैक्टर: बीजेपी नए अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में युवाओं पर फोकस कर रही है। वर्तमान में 70 से 80 वर्ष की उम्र वाले करीब 8 मंत्रियों की कुर्सी पर सस्पेंस बना हुआ है।
- एक व्यक्ति, एक पद: केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः उत्तर प्रदेश और दिल्ली का बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में इस नियम के तहत उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। हालांकि, यूपी चुनाव और कुर्मी वोटबैंक को देखते हुए पंकज चौधरी को बनाए रखने की भी संभावना है।
किसे मिल सकता है नया मौका?
अगले साल यूपी, पंजाब और उत्तराखंड समेत 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे देखते हुए इन राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है।
- महिला और युवा चेहरों को तवज्जो: साल 2029 से लागू होने वाले 33% महिला आरक्षण और जातिगत जनगणना की मांग के बीच कैबिनेट में युवा, महिला और ओबीसी चेहरों को खास तवज्जो मिलने की पूरी उम्मीद है।
- नौकरशाहों और नए सहयोगियों की एंट्री: पूर्व आरबीआई (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास जैसे कुछ पूर्व नौकरशाहों को अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज करने वाले सांसदों, बागी टीएमसी (TMC) नेताओं और एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना (यूबीटी) सांसदों को भी जगह मिल सकती है (बशर्ते दल-बदल कानून के तहत स्पीकर का फैसला उनके पक्ष में आए)। ‘आप’ छोड़कर बीजेपी में आए 7 राज्यसभा सांसदों में से भी एक-दो चेहरों को मौका मिल सकता है।
राज्यसभा का गणित और राज्यपालों की नियुक्ति
अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं क्योंकि उनका राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गया है। वहीं, बिना किसी सदन के सदस्य होते हुए भी रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब चुनाव के मद्देनजर मंत्री बने हुए हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल भी नवंबर में खत्म हो रहा है।
नोट: माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल से हटाए जाने वाले दिग्गजों को राज्यपाल बनाया जा सकता है। आने वाले महीनों में कर्नाटक (थावरचंद गहलोत), मध्य प्रदेश (मंगूभाई पटेल) और उत्तराखंड (लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह) के राज्यपालों का कार्यकाल पूरा हो रहा है।
कैबिनेट में अब तक हुए विस्तार (फ्लैशबैक)
पिछले 12 सालों में मोदी सरकार के कैबिनेट में चार बार बड़े विस्तार हुए हैं:
| तारीख/साल | बदलाव की रूपरेखा |
| नवंबर 2014 | 21 नए मंत्री शामिल किए गए। |
| जुलाई 2016 | 19 नए मंत्री शामिल, 5 को हटाया गया। |
| सितंबर 2017 | 9 नए चेहरे शामिल, 4 प्रमोट हुए, 6 हटाए गए। |
| जुलाई 2021 | 36 नए मंत्री शामिल, 12 की छुट्टी हुई। |
पीएम मोदी हमेशा अपने बड़े फैसले आखिरी समय तक गुप्त रखते हैं, इसलिए स्पष्ट तस्वीर आधिकारिक ऐलान के बाद ही सामने आएगी।




