खरीफ सीजन के लिए बीजों का बंपर स्टॉक, पर ‘अल-नीनो’ के साए में सप्लाई चेन सबसे बड़ी चुनौती: FSII
अल-नीनो के खतरे के बीच खरीफ फसलों के लिए बीज कंपनियों ने 20-30% अतिरिक्त बफर स्टॉक तैयार किया है। जानिए आपूर्ति को लेकर FSII ने क्या बड़ी चिंता जताई है।

नई दिल्ली. देश की निजी बीज कंपनियों ने आगामी खरीफ फसल सत्र के लिए कमर कस ली है। इस बार कंपनियों ने 20 से 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त बीज का बफर स्टॉक तैयार रखा है। हालांकि, इस साल ‘अल-नीनो’ (El Nino) के प्रभाव के कारण मानसून के कमजोर रहने और देरी से आने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में बारिश की कमी से प्रभावित होने वाले मुख्य इलाकों में समय पर बीज पहुंचाना उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। यह बात फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII) ने कही है।
मक्का, धान और मोटे अनाज का रिकॉर्ड उत्पादन
FSII के चेयरमैन अजय राणा ने एक साक्षात्कार में बताया कि इस वर्ष मक्का, धान और मोटे अनाज (मिलेट्स) के रिकॉर्ड बीज उत्पादन से घरेलू उद्योग पूरी तरह तैयार है। हाल ही में एक हजार किसानों पर किए गए एक सर्वेक्षण के आंकड़े बेहद दिलचस्प हैं:
- 75% किसान: मानसून से पहले ही एडवांस में बीज खरीद चुके हैं।
- 25% किसान: बुवाई शुरू करने के लिए अभी भी मानसून की पहली बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
अजय राणा ने कहा: “हम आम तौर पर 15 से 20 प्रतिशत बफर स्टॉक रखने की योजना बनाते हैं, लेकिन इस वर्ष बेहतर उत्पादन के कारण कई कंपनियों के पास 20 से 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त बीज उपलब्ध है। चुनौती बीज की उपलब्धता नहीं, बल्कि बुवाई की अवधि समाप्त होने से पहले सही समय पर प्रभावित क्षेत्रों तक उसकी आपूर्ति सुनिश्चित करना है।”
सरकारी आंकड़े और बाजार की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में बीजों की कोई कमी नहीं है, बल्कि जरूरत से ज्यादा स्टॉक मौजूद है। निजी क्षेत्र देश में 10 लाख से अधिक खुदरा (Retail) विक्रेताओं के नेटवर्क के माध्यम से लगभग 70 प्रतिशत बीजों की आपूर्ति संभालता है।
| बीज उपलब्धता का गणित | आंकड़े (लाख क्विंटल में) |
| प्रमाणित बीज की कुल उपलब्धता | 192.43 लाख क्विंटल |
| खरीफ सीजन की कुल आवश्यकता | लगभग 173 लाख क्विंटल |
| अतिरिक्त सरप्लस स्टॉक | 11.2% (सरकारी स्तर पर) |
12 राज्यों के 315 जिलों पर ‘अल-नीनो’ का साया
सरकार ने मानसून के देरी से आने के कारण प्रभावित होने की आशंका वाले 12 राज्यों के 315 संवेदनशील जिलों की पहचान की है।
FSII के चेयरमैन ने आगाह किया कि अल-नीनो भारतीय खेती, खासकर खरीफ़ के सीजन के लिए अच्छी खबर नहीं है। इसका सबसे बुरा असर उन इलाकों पर पड़ेगा जहां सिंचाई की पारंपरिक सुविधाएं कम हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए किसान अब जल्दी और मध्यम अवधि में तैयार होने वाली (Short & Medium Duration) फसलों की किस्मों की ओर रुख कर रहे हैं, और उद्योग ने उसी के अनुसार बीजों का स्टॉक किया है।
डिजिटल निगरानी शुरू: आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए FSII की सदस्य कंपनियों ने रिमोट सेंसिंग टूल्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद ली है। इसके जरिए संवेदनशील जिलों की वास्तविक समय (Real-time) में निगरानी की जा रही है ताकि जरूरत के हिसाब से तुरंत बीजों को डायवर्ट किया जा सके। सबसे बड़ी परीक्षा जमीनी स्तर पर बेहतर तालमेल स्थापित करने की होगी।




