सिर्फ 5 दिन का तेल बचा! क्या महायुद्ध की स्थिति में रूस बनेगा भारत का संकटमोचक?
EY की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा- भारत के पास सिर्फ 5 दिनों का तेल भंडार सुरक्षित है। जानें संकट के इस दौर में रूस कैसे भारत के लिए संकटमोचक बन रहा है।

नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक खबर सामने आई है। दिग्गज ग्लोबल कंसलटेंसी फर्म ‘अर्न्स्ट एंड यंग’ (EY) की एक ताजा स्टडी के मुताबिक, भारत का रणनीतिक तेल भंडार इस समय बेहद निचले स्तर पर है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यदि दुनिया में कोई बड़ा युद्ध छिड़ता है या तेल की वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ठप होती है, तो भारत के पास अपने इमरजेंसी कोटे में केवल 4.9 दिनों (लगभग 5 दिन) की खपत का ही बैकअप मौजूद है।
चीन और जापान से बहुत पीछे है भारत
आपातकालीन स्थिति से निपटने के मामले में भारत अपने पड़ोसियों के मुकाबले काफी कमजोर स्थिति में खड़ा दिखाई दे रहा है। जहां भारत के पास महज 5 दिनों का स्टॉक है, वहीं:
- चीन: अपनी कुल तेल खपत का करीब 92 दिनों का बैकअप सुरक्षित रख चुका है।
- जापान: इसके पास 77 दिनों का स्टॉक सुरक्षित है।
- दक्षिण कोरिया: करीब 31 दिनों का तेल रिजर्व रखता है।
विदेशी आयात पर बढ़ती निर्भरता
रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशों से आने वाले कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता समय के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
- साल 2000 में भारत को रोजाना केवल 25 लाख बैरल तेल की जरूरत होती थी, जिसका 70% हिस्सा आयात होता था।
- आज भारत की तेल की मांग दोगुनी से अधिक बढ़कर 54 लाख से 56 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच चुकी है।
- नोट: हालांकि भारत इस आयातित कच्चे तेल का करीब एक-चौथाई हिस्सा अपनी घरेलू रिफाइनरियों में रिफाइन करके दूसरे देशों को निर्यात भी करता है, लेकिन घरेलू जरूरत के लिए हम पूरी तरह विदेशी तेल के भरोसे ही हैं।
रूस बना संकटमोचक: टूट गए आयात के सारे रिकॉर्ड
इस गंभीर संकट के बीच रूस एक बार फिर भारत के लिए तारणहार बनकर उभरा है। जून महीने में भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में अब तक के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मौजूदा समय में भारत अपनी कुल जरूरत का 50 प्रतिशत से अधिक तेल अकेले रूस से खरीद रहा है।
‘द टेलीग्राफ’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस वक्त रूस से हर दिन लगभग 25 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात कर रहा है। देश के पश्चिमी तट (वाडिनार) से लेकर पूर्वी तट के बंदरगाहों पर रूसी कच्चे तेल से लदे 8 बड़े टैंकर इस समय डॉक हो चुके हैं या कतार में हैं। एनजीपी एनर्जी कैपिटल मैनेजमेंट के अर्थशास्त्री अनस अलहज्जी के मुताबिक, “भारतीय बंदरगाहों पर एक साथ इतने अधिक रूसी तेल टैंकर पहले कभी नहीं देखे गए।”
यूक्रेन के हमले बने भारत के लिए ‘अवसर’?
साल 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी महज 1 फीसदी से भी कम थी, जो आज बढ़कर नंबर वन पर पहुंच गई है। ऊर्जा मामलों के एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के ताजा घटनाक्रमों से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा हुआ है।
दरअसल, यूक्रेन ने हाल ही में ड्रोन हमलों के जरिए रूस के भीतर कई बड़ी तेल रिफाइनरियों को तबाह कर दिया है। रिफाइनरियां ठप होने के कारण रूस अपने देश में तेल को रिफाइन नहीं कर पा रहा है। ऐसे में मॉस्को के पास कच्चे तेल को सीधे समुद्र के रास्ते सस्ते दामों पर निर्यात करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। वहीं दूसरी तरफ, सुस्त अर्थव्यवस्था के कारण चीन का तेल आयात 1.5 करोड़ बैरल प्रति दिन से घटकर करीब 1 करोड़ बैरल रह गया है, जिसका सीधा फायदा उठाते हुए भारत ने रूसी तेल के बाजार पर कब्जा मजबूत कर लिया है।




