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होर्मुज में आते ही रडार से क्यों ‘गायब’ हो रहे भारतीय जहाज? क्या तेल सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा?

ईरान-खाड़ी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत आने वाले 62% तेल टैंकरों ने AIS ट्रैकिंग बंद की। जानिए क्या भारत की क्रूड ऑयल और ईंधन सप्लाई पर कोई खतरा है? पूरी रिपोर्ट।

नई दिल्ली. ईरान और खाड़ी क्षेत्र (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भारत आने वाले 60 फीसदी से ज्यादा कमर्शियल जहाज अचानक पब्लिक ट्रैकिंग सिस्टम से “गायब” होने लगे हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि ये जहाज वास्तव में लापता नहीं हुए हैं। सुरक्षा कारणों और संभावित हमलों से बचने के लिए ये जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में प्रवेश करते ही अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद या सीमित कर रहे हैं।

क्या है AIS और युद्ध के माहौल में क्यों बन रहा खतरा?

ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) एक ऐसा वैश्विक समुद्री ट्रैकिंग सिस्टम है, जो किसी भी कमर्शियल जहाज की पहचान, उसकी सटीक लोकेशन, स्पीड और गंतव्य (Destination) की जानकारी लगातार सैटेलाइट्स को प्रसारित करता है। इससे दूसरे जहाज और बंदरगाह उनकी निगरानी कर पाते हैं। लेकिन मौजूदा तनाव वाले माहौल में यही लाइव डेटा जहाजों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है, क्योंकि दुश्मन ताकतें इस डेटा का इस्तेमाल करके जहाजों को निशाना बना सकती हैं।

क्या भारतीय जहाजों से टूट गया है संपर्क?

समुद्री खुफिया डेटा फर्म Kpler के मुताबिक, भारत आने वाले करीब 62 फीसदी तेल टैंकर और मालवाहक जहाज होर्मुज से गुजरते समय अपनी सार्वजनिक लोकेशन छिपा रहे हैं।

अहम बात: इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जहाजों का कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया है। ये जहाज भारतीय नौसेना (Indian Navy), तटीय सुरक्षा एजेंसियों और अपनी शिपिंग कंपनियों के साथ सुरक्षित व एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों के जरिए 24×7 जुड़े हुए हैं। केवल सार्वजनिक ट्रैकिंग वेबसाइटों पर इनकी लाइव लोकेशन दिखाई नहीं दे रही है।

भारत की ईंधन और क्रूड ऑयल सप्लाई पर क्या होगा असर?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील और अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल कारोबार का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। भारत के लिए इसकी अहमियत इसलिए दोगुनी है क्योंकि देश के लगभग आधे कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात के साथ-साथ बड़ी मात्रा में LNG और LPG भी सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और UAE से इसी रास्ते होकर आती है।

ग्राउंड रिपोर्ट: पिछले 72 घंटों में क्या हुआ?

फिलहाल राहत की बात यह है कि भारत की ईंधन सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है और इस पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ा है। जहाजरानी और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार:

  • पिछले 72 घंटों में 9 जहाज इस संवेदनशील रास्ते से सुरक्षित गुजरे हैं, जिनमें से 7 भारत के लिए आ रहे थे।
  • करीब 15 अन्य जहाज (जो खाद और ऊर्जा से जुड़े हैं) अभी सुरक्षित मार्ग मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
  • भारतीय अधिकारी अतिरिक्त सावधानी और विशेष सिक्योरिटी कॉरिडोर के जरिए जहाजों का आवागमन जारी रखे हुए हैं।

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