राजनीतिक

लोकसभा में राहुल गांधी ने मोदी के महाकुंभ पर दिए गए संबोधन पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जताई नाराजगी

नई दिल्ली
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महाकुंभ पर दिए गए संबोधन पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राहुल गांधी ने कहा कि वह महाकुंभ को पीएम मोदी के बयान का समर्थन करना चाहते थे। हालांकि, उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि प्रधानमंत्री ने महाकुंभ में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि नहीं दी।

राहुल गांधी ने कहा, "जो प्रधानमंत्री ने बोला, मैं उसको सपोर्ट करना चाहता था। कुंभ हमारी परंपरा, इतिहास और संस्कृति है। लेकिन हमारी एकमात्र शिकायत यह है कि पीएम ने कुंभ में अपनी जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि नहीं दी।" उन्होंने आगे कहा कि महाकुंभ में शामिल होने वाले युवाओं की प्रधानमंत्री से एक और अपेक्षा है, और वह है रोजगार। उन्होंने कहा, "जो युवा महाकुंभ गए, वे चाहते हैं कि पीएम उन्हें रोजगार दें।"

कांग्रेस नेता ने लोकतांत्रिक संरचना का हवाला देते हुए यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "लोकतांत्रिक ढांचे के अनुसार, विपक्ष के नेता को बोलने का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन वे हमें बोलने नहीं देते। यह नया भारत है।" राहुल गांधी का यह बयान उस समय आया है, जब लोकसभा में महाकुंभ और अन्य मुद्दों पर चर्चा जारी है। विपक्ष ने पहले भी महाकुंभ के दौरान हुई दुर्घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे, और अब रोजगार जैसे अहम मुद्दे को जोड़कर सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए ‘महाकुंभ’ को भारत के इतिहास में अहम मोड़ करार देते हुए मंगलवार को लोकसभा में कहा कि दुनिया ने देश के विराट स्वरूप को देखा और यह ‘सबका प्रयास’ का साक्षात स्वरूप भी था, जिसमें ‘एकता का अमृत’ समेत कई अमृत निकले। उन्होंने निचले सदन में प्रयागराज महाकुंभ को लेकर दिए एक वक्तव्य में यह भी कहा कि महाकुंभ में अनेकता में एकता का विराट रूप, देश की सामूहिक चेतना और सामर्थ्य भी दिखा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए ‘महाकुंभ’ को भारत के इतिहास में अहम मोड़ करार देते हुए मंगलवार को लोकसभा में कहा कि दुनिया ने देश के विराट स्वरूप को देखा और यह ‘सबका प्रयास’ का साक्षात स्वरूप भी था, जिसमें ‘एकता का अमृत’ समेत कई अमृत निकले। उन्होंने निचले सदन में प्रयागराज महाकुंभ को लेकर दिए एक वक्तव्य में यह भी कहा कि महाकुंभ में अनेकता में एकता का विराट रूप, देश की सामूहिक चेतना और सामर्थ्य भी दिखा।

INE Desk

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