मध्य प्रदेश

भारतीय रेलवे में नया कीर्तिमान: WCR की 100 से ज्यादा वैगन वाली अनब्रोकन मालगाड़ी

मध्य प्रदेश में पश्चिम रेलवे ने पहली अनब्रोकन लॉन्ग हॉल मालगाड़ी का सफल ट्रायल किया। 585 किमी दूरी तय कर रेलवे ने माल परिवहन क्षमता में नया रिकॉर्ड बनाया।

इंदौर. देश के रेलवे नेटवर्क में अब लॉन्ग हॉल क्षमता वाली एक और मालगाड़ी जुड़ गई है, जिससे एक ही बार में हजारों टन माल देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचाया जा सकेगा। Indian Railways के अंतर्गत Western Railway के रतलाम मंडल ने इस क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। 10 जनवरी को वटवा से बकानियां भौरी के बीच अब तक की सबसे लंबी दूरी वाली अनब्रोकन लॉन्ग हॉल मालगाड़ी का सफल ट्रायल किया गया, जिसने करीब 585 किलोमीटर की दूरी तय की।

क्या होती है अनब्रोकन लॉन्ग हॉल ट्रेन?

लॉन्ग हॉल ट्रेन वे मालगाड़ियां होती हैं, जिन्हें भारी से भारी लोड के साथ लंबी दूरी के लिए कनेक्ट करके चलाया जाता है।

  • ऐसी ट्रेनों की लंबाई 3 से 4 किलोमीटर तक हो सकती है।
  • पहले देश में पहली लॉन्ग हॉल ट्रेन ‘रुद्रास्त्र’ चलाई गई थी, जो करीब 4.5 किलोमीटर लंबी थी।
  • रुद्रास्त्र में 6 मालगाड़ियों को जोड़कर 7 इंजन लगाए गए थे और इसमें 354 डिब्बे थे।
  • अनब्रोकन का अर्थ है बिना रुके, बिना किसी स्टॉपेज के लगातार चलने वाली ट्रेन, जो इसे सामान्य लॉन्ग हॉल ट्रेनों से अलग बनाता है।

मध्य प्रदेश में पहली बार अनब्रोकन लॉन्ग हॉल का संचालन

मध्य प्रदेश में पहली बार पश्चिम रेलवे ने अनब्रोकन लॉन्ग हॉल मालगाड़ी का सफल संचालन किया है। इस ट्रेन में 2 EBOXN रेक को जोड़ा गया, जिनमें 100 से अधिक डिब्बे शामिल थे। रेलवे के अनुसार, भविष्य में ऐसी ट्रेनों में 7 तक इंजन और 350 तक डिब्बे लगाए जा सकते हैं।

11 घंटे की समय बचत, ढुलाई क्षमता में बड़ी बढ़त

पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार—

  • ट्रेन की अधिकतम अनुमत गति 70 किमी/घंटा थी।
  • वटवा से बकानियां भौरी तक की दूरी 12 घंटे 58 मिनट में पूरी की गई।
  • ट्रेन की औसत गति 46.98 किमी/घंटा रही।
  • पारंपरिक मालगाड़ियों की तुलना में करीब 11 घंटे की समय बचत सुनिश्चित हुई।
  • उन्होंने बताया कि यह सफलता विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, सटीक योजना और प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है।

संसाधनों की बचत, रेलवे को मिलेगा बड़ा फायदा

रेलवे पीआरओ ने कहा कि कई किलोमीटर लंबी इन ट्रेनों को एक साथ लंबी दूरी तक चलाने से न केवल चालक दल बल्कि अन्य परिचालन संसाधनों की भी बचत होती है। इससे भारतीय रेलवे की ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति मिलेगी।

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