राजनीतिक

राहुल गांधी की चेतावनी के बाद पलटे उदयनिधि स्टालिन, बोले- ‘हम हमेशा से परिसीमन के खिलाफ’

परिसीमन पर डीएमके का रुख साफ। उदयनिधि स्टालिन ने कहा- पार्टी हमेशा से परिसीमन के खिलाफ रही है। राहुल गांधी के बयान के बाद आया बड़ा फैसला।

चेन्नई/नई दिल्ली। देश में संभावित परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण को लेकर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के रुख पर बना सस्पेंस खत्म हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी इस परिसीमन प्रक्रिया का शुरुआत से विरोध करती आई है और आगे भी इसका सख्त विरोध जारी रखेगी। स्टालिन के इस बयान से INDIA गठबंधन ने राहत की सांस ली है, क्योंकि पिछले कुछ समय से डीएमके के केंद्र सरकार के पक्ष में जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं।

राहुल गांधी ने दी थी ‘एट्टाप्पन’ कहने की चेतावनी

डीएमके के रुख में आ रहे बदलाव की खबरों के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तमिलनाडु दौरे के दौरान बेहद आक्रामक रुख अपनाया था। राहुल ने कहा था कि जो भी पार्टी या नेता तमिलनाडु के हितों के खिलाफ जाकर इस परिसीमन का समर्थन करेगा, वह राज्य की जनता के साथ धोखा करेगा। राहुल ने समर्थन करने वालों को 21वीं सदी का ‘एट्टाप्पन’ (तमिल परंपरा में गद्दार का प्रतीक) तक कह दिया था। माना जा रहा है कि इस राजनीतिक दबाव के बाद ही डीएमके ने अपना रुख सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है।

क्या थीं DMK की तीन शर्तें?

इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसदों वाली डीएमके केंद्र सरकार को तीन शर्तों पर समर्थन देने पर विचार कर रही थी। इनमें परिसीमन का आधार 2011 की जगह अगले 25 वर्षों के लिए 1971 की जनगणना को बनाना, सभी राज्यों की सीटों में 50 फीसदी की समान बढ़ोतरी करना और संसद के बिल में ही राज्यवार सीटों का स्पष्ट खाका पेश करना शामिल था। हालांकि, अब उदयनिधि स्टालिन ने किसी भी तरह के समझौते से इनकार करते हुए परिसीमन के विरोध का झंडा बुलंद रखा है।

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