छत्तीसगढ़ में बाढ़ के बाद पुनर्वास तेज, बस्तर में सूखे की आहट से किसान परेशान
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में बाढ़ का पानी कम होने के बाद पुनर्वास कार्य शुरू हो गए हैं, जबकि जगदलपुर में बारिश थमने से धान की फसल को सूखने से बचाने के लिए किसान मानसून पर निर्भर हैं।
बीजापुर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर में जलस्तर घटने के बाद पुनर्वास और सर्वे का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सड़कों, स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, जगदलपुर और आसपास के इलाकों में बारिश थमने से धान के खेतों में नमी कम हो रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम के इस दोहरे प्रभाव से एक तरफ राहत कार्य चल रहे हैं तो दूसरी तरफ खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
बीजापुर में बाढ़ के बाद सर्वेक्षण और मुआवजे की प्रक्रिया तेज
बीजापुर जिले में नदियों का जलस्तर घटने के साथ ही बाढ़ से हुए नुकसान के सटीक आकलन का काम शुरू कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को प्रभावित इलाकों में तुरंत सर्वे करने के निर्देश दिए हैं ताकि नियमानुसार प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता राशि जल्द से जल्द मिल सके।
प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे और स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली
भोपालपटनम और भैरमगढ़ क्षेत्र बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जहाँ स्थिति में सुधार के बावजूद सतर्कता बरती जा रही है। राहत शिविरों में भोजन और पीने के पानी का पर्याप्त प्रबंध किया गया है, जबकि क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत को प्राथमिकता दी जा रही है। जलजनित बीमारियों और मलेरिया के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग विशेष निगरानी रख रहा है।
जगदलपुर में धूप और बारिश की कमी से बढ़ी किसानों की चिंता
जगदलपुर संभाग में कुछ समय पहले हुई अच्छी बारिश से धान की रोपाई का काम पूरा हो गया था, लेकिन अब बारिश रुकने से खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। तेज धूप के कारण फसलों की वृद्धि रुकने की आशंका बढ़ गई है, जिससे कृषि कार्यों पर बुरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
मानसून पर निर्भरता और आने वाले दिनों की मौसम स्थिति
संभाग के अधिकांश हिस्सों में सामान्य वर्षा हुई है, लेकिन कांकेर जिले में अब भी बारिश का कोटा काफी कम है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार फिलहाल भारी बारिश के आसार कम हैं, जिससे किसानों की नजरें आसमान पर टिकी हैं और अगली बारिश ही फसलों का भविष्य तय करेगी।




