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स्कूल लाइब्रेरी विवाद: तीन आरोपियों से लंबी पूछताछ, किताबों की छपाई और खरीद प्रक्रिया जांच के घेरे में

जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में मिली विवादित किताबों की जांच तेज हो गई है। पुलिस छपाई, सामग्री तैयार करने, मंजूरी और खरीद प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

जम्मू-कश्मीर. जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में मिली विवादित किताबों के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। काउंटर इंटेलिजेंस (सीआई) ने रिमांड पर चल रहे तीनों आरोपियों से विस्तृत पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया कि विवादित सामग्री किस स्तर पर तैयार हुई, उसे किताबों में शामिल करने का निर्णय किसने लिया और वह सरकारी खरीद प्रक्रिया तक कैसे पहुंची। जांच का फोकस पूरे घटनाक्रम की प्रत्येक कड़ी को जोड़ने पर है।

कंटेंट तैयार करने से अंतिम मंजूरी तक की पड़ताल

जांच के दौरान जम्मू के प्रकाशक इंदरपाल, दिल्ली के प्रिंटर अमरदीप सिंह और गुरुग्राम निवासी गिरीश अरोड़ा से अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई। एजेंसी ने उनके बयानों का मिलान पहले से जब्त कंप्यूटर, मोबाइल फोन, ई-मेल, हार्ड डिस्क और अन्य दस्तावेजों से किया। जांचकर्ता यह स्पष्ट करने में जुटे हैं कि किताबों की सामग्री किसने तैयार की, अंतिम स्वीकृति किस स्तर पर मिली और छपाई से पहले उसकी समीक्षा किसके द्वारा की गई।

खरीद और आपूर्ति से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच एजेंसी अब किताबों की खरीद और आपूर्ति प्रक्रिया की भी विस्तार से पड़ताल कर रही है। पूछताछ के दौरान कुछ नए नाम सामने आने की बात सामने आई है, हालांकि जांच प्रभावित न हो इसलिए फिलहाल उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। माना जा रहा है कि आगे चलकर शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों, खरीद समिति के सदस्यों और पुस्तक चयन प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच जारी

मामले की तह तक पहुंचने के लिए जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी जारी है। ई-मेल, डिलीट किए गए डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का विश्लेषण कर यह पता लगाया जा रहा है कि पूरा मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित था या इसके पीछे कई लोगों की संगठित भूमिका रही। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच की दिशा आगे तय की जाएगी।

लाइब्रेरी में मिली विवादित किताबों के बाद शुरू हुई कार्रवाई

यह मामला उस समय सामने आया जब सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में उपलब्ध कुछ किताबों में अलगाववाद और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े व्यक्तियों के कथित महिमामंडन का दावा किया गया। इसके बाद शिक्षा विभाग ने आठ अधिकारियों को निलंबित किया और तीन प्रकाशकों को ब्लैकलिस्ट कर दिया। अब जांच एजेंसियां पूरे मामले के मास्टरमाइंड, सामग्री तैयार करने वालों और खरीद प्रक्रिया में शामिल सभी जिम्मेदार पक्षों की भूमिका स्पष्ट करने में जुटी हैं।

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