मध्य प्रदेश

जबलपुर में सिस्टम फेल! बदहाल सड़क के कारण 2 किमी पैदल चली गर्भवती, मां और अजन्मे बच्चे की दर्दनाक मौत

Jabalpur News: जबलपुर के एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड की ब्रजपुरी कॉलोनी में सड़क की बदहाली के कारण एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मौत हो गई। कॉलोनी में गाड़ी न आने के कारण पीड़िता को 2 किमी पैदल चलना पड़ा था।

जबलपुर. स्मार्ट सिटी और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता और जमीनी हकीकत की पोल खोलकर रख दी है। शहर की सीमा से लगे एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड (ब्रजपुरी कॉलोनी) में सड़क की बदहाली एक 22 वर्षीय गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे के लिए काल बन गई। समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण ममता कुशवाहा और उनके शिशु की मौत हो गई, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

प्रसव पीड़ा में तड़पती रही मासूम, रास्ता बना सबसे बड़ी बाधा

शुक्रवार शाम करीब साढ़े सात महीने की गर्भवती ममता कुशवाहा को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उस समय उनके पति अमन कुशवाहा मजदूरी के लिए बाहर गए थे। घर पर मौजूद जेठानी ने तुरंत एम्बुलेंस और वाहनों को बुलाने की कोशिश की, लेकिन कॉलोनी की सड़क कीचड़ और गहरे गड्ढों से इस कदर बदहाल थी कि वाहन चालकों ने अंदर आने से साफ मना कर दिया।

कोई रास्ता न बचता देख, बेहद गंभीर हालत और दर्द से कराहते हुए ममता को अपनी जेठानी के सहारे करीब दो किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करना पड़ा। हर कदम के साथ ममता का दर्द और खतरे दोनों बढ़ते जा रहे थे।

अस्पतालों के बीच दौड़ती रही जिंदगी, कीमती समय हाथ से निकला

मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद परिजनों ने किसी तरह एक ऑटो का इंतजाम किया और ममता को लेडी एल्गिन अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, वहां डॉक्टरों ने उनकी नाजुक हालत को देखते हुए तुरंत नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

लापरवाही की भारी कीमत: एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल की इस जद्दोजहद और सड़क पर खराब रास्ते के कारण हुआ विलंभ भारी पड़ गया। मेडिकल कॉलेज पहुंचते-पहुंचते गर्भ में पल रहे शिशु ने दम तोड़ दिया और इसके कुछ ही देर बाद ममता की सांसें भी थम गईं।

अब व्यवस्था और स्मार्ट सिटी के दावों पर उठ रहे गंभीर सवाल

इस दर्दनाक हादसे के बाद ब्रजपुरी कॉलोनी के रहवासियों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की बदहाल सड़कों और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर नगर निगम और संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस घटना ने एक बार फिर यह कड़वा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कागजी विकास किस काम का, जब एक नागरिक को बुनियादी चिकित्सा सुविधा के लिए अपनी जान गंवानी पड़े।

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