परिवार, सलाह और सियासत: नवनीत राणा के बयान पर शिवसेना की कड़ी प्रतिक्रिया
नवनीत राणा के तीन-चार बच्चे पैदा करने वाले बयान पर शिवसेना (उद्धव) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का तीखा पलटवार। बोलीं—पहले अपने पति और पड़ोसियों को कन्विन्स करें, देश की महिलाओं को नहीं।
नई दिल्ली. महाराष्ट्र की विपक्षी पार्टी शिवसेना (उद्धव ठाकरे) की नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा नेता और पूर्व सांसद नवनीत राणा के उस बयान की कड़ी आलोचना की है, जिसमें राणा ने देशभर के हिंदुओं से हिंदुस्तान को बचाने के लिए तीन–चार बच्चे पैदा करने की नसीहत दी थी।
एक टीवी चैनल से बातचीत में चतुर्वेदी ने कहा, “वो पहले अपने पति से इस बारे में बात करें। खुद अपने बच्चे बढ़ाएं, फिर अपने पड़ोसियों को कन्विन्स करें। जो अपने पति या पड़ोसियों को कन्विन्स नहीं कर सकते, वो देश की महिलाओं को कन्विन्स करना बंद करें।”
क्या था नवनीत राणा का बयान
भाजपा नेता नवनीत राणा ने मंगलवार (23 दिसंबर) को कहा था कि हिंदुओं को कम से कम तीन-चार बच्चे पैदा करने चाहिए, ताकि उन लोगों की कथित साजिशों का मुकाबला किया जा सके जो ज्यादा बच्चे पैदा कर देश की जनसांख्यिकी बदलना चाहते हैं।
पत्रकारों से बातचीत में राणा ने कहा था, “मैं सभी हिंदुओं से अपील करती हूं। ये लोग खुलेआम कहते हैं कि उनकी चार पत्नियां और 19 बच्चे हैं। मेरा सुझाव है कि हमें भी कम से कम तीन-चार बच्चे पैदा करने चाहिए।”
अमरावती में दिया गया बयान, मचा सियासी बवाल
नवनीत राणा ने यह टिप्पणी अमरावती में मीडिया से बातचीत के दौरान की थी। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग बड़ी संख्या में बच्चे पैदा कर हिंदुस्तान को पाकिस्तान में बदलना चाहते हैं, इसलिए हिंदुओं को एक बच्चे तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
उद्धव ठाकरे और मनसे गठबंधन पर भी तंज
इस दौरान राणा ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच बृहन्मुंबई महानगर पालिका चुनाव के लिए संभावित गठबंधन को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे अब “बेबसी का पर्याय” बन चुके हैं और अगर कोई उनके साथ जुड़ता है, तो उसका प्रदर्शन स्थानीय निकाय चुनावों में भी कमजोर रहेगा।
सियासी बयानबाजी तेज
नवनीत राणा के बयान और प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इसे भड़काऊ और महिला-विरोधी बयान बता रहा है, जबकि भाजपा समर्थक इसे जनसंख्या संतुलन से जोड़कर देख रहे हैं।




