मध्य प्रदेश

MP शिक्षक भर्ती: हाई कोर्ट से अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, चॉइस फिलिंग की मिली मंजूरी; नियुक्ति पर फिलहाल रोक

मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती मामले में हाई कोर्ट ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए चॉइस फिलिंग की अनुमति दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगाई है। पूरी खबर पढ़ें।

जबलपुर: मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े डेढ़ हजार से अधिक अभ्यर्थियों के लिए राहत की बड़ी खबर है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए चॉइस फिलिंग की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह साफ किया है कि अभ्यर्थी चॉइस फिलिंग प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं, लेकिन उनके नियुक्ति आदेश फिलहाल जारी नहीं किए जाएंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

1500 से अधिक अभ्यर्थियों से जुड़ा है मामला, कोर्ट ने स्वीकार की संयुक्त याचिका

हाई कोर्ट के समक्ष भोपाल की रहने वाली प्रिया देव सहित अन्य अभ्यर्थियों द्वारा मध्य प्रदेश शासन व अन्य के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता प्रवीण कुमार वर्मा और डॉ. ज्योति वर्मा ने कोर्ट में दलील दी कि सभी याचिकाकर्ता एक जैसी शर्तों और विवाद से प्रभावित हैं। ऐसी स्थिति में सभी के लिए अलग-अलग याचिकाएं दायर करना व्यावहारिक नहीं होगा। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए अभ्यर्थियों के संयुक्त याचिका दायर करने संबंधी आवेदन को मंजूरी दे दी।

पुराने फैसले का दिया हवाला, चॉइस फिलिंग को हरी झंडी

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता वर्मा ने कोर्ट को बताया कि ठीक इसी तरह के एक अन्य मामले (डब्ल्यूपी क्रमांक 21474/2026) में हाई कोर्ट द्वारा 19 जून, 2026 को अंतरिम राहत प्रदान की जा चुकी है। कोर्ट ने समानता के सिद्धांत के आधार पर तर्कों से सहमति जताई और याचिकाकर्ताओं को चल रही शिक्षक भर्ती की चॉइस फिलिंग प्रक्रिया में शामिल होने की इजाजत दे दी। हालांकि, अंतिम नियुक्ति आदेश जारी करने पर अगली सुनवाई तक रोक बरकरार रहेगी।

सरकार को नोटिस जारी, 4 सप्ताह में मांगा जवाब

इस मामले में राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रवीण नामदेव कोर्ट में उपस्थित रहे। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिवादियों (राज्य सरकार व अन्य विभागों) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट अब इस मामले पर चार सप्ताह बाद संबंधित मुख्य याचिका के साथ आगे की सुनवाई करेगा।

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