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महाराष्ट्र पॉलिटिक्स: ‘कुत्ते झुंड में आते हैं, टाइगर अकेला…’ वाले सीएम शिंदे के बयान पर भड़के संजय राउत, X पर लिखी ये बड़ी बात

महाराष्ट्र में शिवसेना के स्थापना दिवस पर एकनाथ शिंदे के 'कुत्ता-शेर' वाले बयान पर सियासत गरमा गई है। उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया पर तीखा पलटवार किया है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

मुंबई. महाराष्ट्र की सियासत में ‘शेर और कुत्ते’ वाले बयानों को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर गोरेगांव में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे गुट (UBT) पर तीखा हमला बोला था। शिंदे ने उद्धव गुट के सांसदों में संभावित टूट का जिक्र करते हुए कहा था, “यह तो सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।”

सीएम शिंदे ने विरोधी खेमे को लपेटे में लेते हुए आगे कहा, “ऑपरेशन के लिए शेर का दिल चाहिए। कुत्ते झुंड में आते हैं, लेकिन टाइगर हमेशा अकेला आता है।” अब शिंदे के इसी बयान पर उद्धव ठाकरे के सबसे करीबी नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी और बेहद आक्रामक पोस्ट के जरिए पलटवार किया है।

“कुछ लोग कुत्ते होते हैं लेकिन वफादार नहीं” – संजय राउत का तीखा हमला

मुख्यमंत्री शिंदे के बयान के ठीक एक दिन बाद शनिवार को संजय राउत ने अपने ‘X’ (ट्विटर) हैंडल पर ‘जय महाराष्ट्र!’ कैप्शन के साथ एक इन्फोग्राफिक शेयर किया। इस पोस्ट पर साफ शब्दों में लिखा था— “कुछ लोग कुत्ते होते हैं, लेकिन वफादार नहीं होते।”

मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा, “आप एकनाथ शिंदे को इतना गंभीरता से क्यों लेते हैं? उन्हें गंभीरता से लेना बंद करें। वे कोई महान व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि एक बेईमान नेता हैं। इन्होंने अपने ही लोगों को धोखा दिया है। जब तक वे सत्ता में हैं और जब तक उनके हाथ में पैसा है, वे ऐसी हवा-हवाई बातें कहते रहेंगे।”

क्या उद्धव ठाकरे के सांसदों में फिर होने वाली है बड़ी बगावत?

महाराष्ट्र के गलियारों में इस सियासी युद्ध की मुख्य वजह सांसदों की संभावित टूट को माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा जोरों पर है। सूत्रों के मुताबिक, दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के सिंबल ‘मशाल’ पर चुनाव जीतकर आए 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।

अगर यह दावा सच साबित होता है, तो उद्धव ठाकरे के पास संसद में सिर्फ 3 सांसद ही रह जाएंगे। सियासी गलियारों में यह भी सुगबुगाहट है कि इन बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को अपना पत्र भी सौंप दिया है और 21 जून को इसका औपचारिक ऐलान किया जा सकता है। इसी उठापटक के बीच दोनों गुटों के बीच जुबानी तीर और तीखे हो गए हैं।

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