लाहौर की सड़कों पर सियासी संघर्ष: केपी सीएम अफरीदी की रैली से बढ़ी शरीफ सरकार की मुश्किलें
केपी के सीएम सोहेल अफरीदी की लाहौर के मीनार-ए-पाकिस्तान में रैली से पाक राजनीति गरमाई। पीटीआई की ताकत, पुलिस पाबंदियां और सियासी संदेश—पूरी रिपोर्ट।
लाहौर. खैबर पख्तूनख्वा (केपी) के युवा वजीर-ए-आला सोहेल अफरीदी इन दिनों पाकिस्तानी हुकूमत के सामने बड़ी सियासी चुनौती बनकर उभरे हैं। वे इन दिनों लाहौर में हैं और रविवार को ऐतिहासिक मीनार-ए-पाकिस्तान पर एक विशाल पब्लिक रैली का नेतृत्व करेंगे। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, उनका पंजाब की राजधानी को चुनना मुल्क की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट माना जा रहा है।
लाहौर क्यों बना सियासी रणक्षेत्र
केपी से बाहर निकलकर लाहौर में ताकत दिखाने का अफरीदी का दांव प्रतीकात्मक भी है और रणनीतिक भी। मीनार-ए-पाकिस्तान वही ऐतिहासिक स्थल है, जहां 1940 में लाहौर प्रस्ताव पेश हुआ था और बंटवारे की नींव पड़ी थी। अतीत में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ जैसी पार्टियों ने यहीं से जनसमर्थन का प्रदर्शन किया है।
पीटीआई की हाई-प्रोफाइल मौजूदगी
अफरीदी का यह दौरा पंजाब में पीटीआई के लगातार प्रभाव का हाई-प्रोफाइल प्रदर्शन माना जा रहा है। पार्टी संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर अफरीदी पहले ही सत्ताधारी गठबंधन के निशाने पर हैं। उन्होंने रैली को पंजाब में पीटीआई की ‘मोबिलाइजेशन ताकत’ का प्रतीक बताया है।
पुलिस पाबंदियां और बढ़ता तनाव
दौरे के दौरान पुलिस की सख्ती साफ दिखी। शुक्रवार रात लिबर्टी राउंडअबाउट पर पहुंचने पर रास्ते सील कर दिए गए और पिकेटिंग के चलते भीड़ तितर-बितर हो गई, जिससे तय भाषण नहीं हो सका। गालिब मार्केट इलाके में सड़क जाम और नारेबाजी को लेकर पीटीआई कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज हुए हैं और गिरफ्तारियां भी हुई हैं।
सीधी चुनौती और सियासी संदेश
अपने तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन अफरीदी ने ऐलान किया कि रैली शाम 6 बजे शुरू होगी। उन्होंने विरोधी दलों को चुनौती देते हुए कहा कि वे केपी में भी ऐसा ही आयोजन करें—ज़रूरत पड़ी तो लॉजिस्टिक मदद भी दी जाएगी। “वे कोई भी जगह चुन सकते हैं। देखते हैं कौन ज्यादा लोगों को जुटा पाता है,” अफरीदी ने कहा।
जेल में बंद नेताओं के परिवारों से मुलाकात
कोट लखपत जेल में एंट्री न मिलने के बाद अफरीदी ने जेल में बंद पीटीआई नेताओं के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, डॉ. यास्मीन राशिद, एजाज चौधरी और मियां महमूद-उर-रशीद के परिजनों से भेंट की। अफरीदी ने पंजाब सरकार पर मुलाकात के औपचारिक अनुरोधों की अनदेखी का आरोप लगाया और जेल में बंद नेताओं को “गलत तरीके से कैद” बताया।
कानूनी समुदाय से संवाद
पत्रकारों से बातचीत में अफरीदी ने ‘पॉलिटिकल इनटॉलेरेंस’ का आरोप लगाया और कहा कि उनके आवागमन पर पाबंदियां व वैध सियासी गतिविधियों में दखल दिया जा रहा है। उन्होंने लाहौर हाई कोर्ट में लीगल कम्युनिटी को संबोधित करते हुए पंगु न्याय प्रणाली और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर चिंता जताई।
बातचीत बनाम आंदोलन
फेडरल सरकार से संभावित बातचीत पर अफरीदी ने कहा कि यह जिम्मेदारी विपक्षी गठबंधन तहरीक-ए-तहफुज-ए-ऐन-ए-पाकिस्तान को सौंपी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीटीआई संवाद का समर्थन करती है, लेकिन सड़कों पर लामबंदी की तैयारी पूरे पैमाने पर जारी रहेगी।
आगे की राह
अफरीदी पार्टी कार्यकर्ताओं और शहीद पीटीआई कार्यकर्ता अली बिलाल (जिल्ले शाह) के परिवार से भी मिलने वाले हैं। पार्टी को उम्मीद है कि रविवार की मीनार-ए-पाकिस्तान रैली में भारी भीड़ उमड़ेगी—जो पंजाब में सियासी संतुलन पर दूरगामी असर डाल सकती है।




