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2026 में बदलेगा वर्किंग सिस्टम: लेबर कोड के साथ EPFO 3.0 का रोलआउट

केंद्र सरकार 2026 में चारों लेबर कोड पूरी तरह लागू करने की तैयारी में। ईपीएफओ 3.0 से पीएफ, पेंशन और बीमा प्रक्रिया होगी आसान। ट्रेड यूनियनों का विरोध, उद्योग जगत का समर्थन।

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने पांच साल के लंबे इंतजार के बाद देश में चारों लेबर कोड्स को पूरी तरह लागू करने की दिशा में प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार के अनुसार, इन संहिताओं से जुड़े नियम अधिसूचित होने के बाद वर्ष 2026 में ये पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे। इसके लागू होने से देशभर के श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार से जुड़े अधिकार एक समान और व्यापक ढांचे में सुनिश्चित हो सकेंगे।

ईपीएफओ 3.0 की तैयारी, पीएफ और पेंशन प्रक्रिया होगी आसान

श्रम मंत्रालय वर्ष 2026 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का उन्नत संस्करण ईपीएफओ 3.0 लाने की तैयारी में है। इसके तहत कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) की निकासी प्रक्रिया को और अधिक सरल व तेज बनाया जाएगा।

इसके साथ ही कर्मचारी पेंशन योजना–1995 के तहत पेंशन निर्धारण और कर्मचारी जमा से जुड़ी बीमा योजना–1976 के अंतर्गत बीमा दावों के निपटान की प्रक्रिया भी आसान की जाएगी।

2025 श्रम और रोजगार तंत्र के लिए परिवर्तनकारी वर्ष

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि वर्ष 2025 भारत के श्रम और रोजगार तंत्र के लिए एक परिवर्तनकारी वर्ष रहा है। उन्होंने बताया कि 21 नवंबर 2025 से चारों लेबर कोड्स लागू हो चुके हैं, जिनके तहत 29 पुराने श्रम कानूनों को एक आधुनिक, सरल और समग्र ढांचे में समाहित किया गया है।

मंत्री के अनुसार, 2026 में सरकार का फोकस तकनीक आधारित सेवाओं, जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और लेबर कोड्स के नियमों को लागू करने पर रहेगा। इससे कार्यस्थलों पर स्पष्टता, समानता और पूर्वानुमेयता बढ़ेगी और भारत एक आधुनिक, औपचारिक व समावेशी श्रम बाजार की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।

दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजन का लक्ष्य

मनसुख मांडविया ने बताया कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये के परिव्यय से अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि नीतिगत प्रयासों के चलते सामाजिक सुरक्षा कवरेज 10 साल पहले के 19 प्रतिशत से बढ़कर अब 64 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ी श्रमिकों की पहुंच

मंत्री ने कहा कि ईपीएफओ में किए गए सुधारों से पीएफ निकासी पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल हुई है। इसके अलावा ई-श्रम पोर्टल और नेशनल करियर सर्विस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म बड़ी संख्या में श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

ट्रेड यूनियनों का विरोध, उद्योग जगत का समर्थन

हालांकि, कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने लेबर कोड्स को श्रमिक-विरोधी बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। 22 दिसंबर 2025 को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।

वहीं उद्योग जगत, खासकर भारतीय उद्योग परिसंघ से जुड़े प्रतिनिधियों ने इन सुधारों का समर्थन किया है। उनका मानना है कि लेबर कोड्स से श्रमिक कल्याण के साथ-साथ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा और भारत का श्रम तंत्र अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा।

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