छत्तीसगढ़

CG High Court: योग्यता न होने पर भी आश्रित को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति; हाईकोर्ट का जिला पंचायत को बड़ा झटका

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति पर बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की पीठ ने कहा कि योग्यता न होने पर भी आश्रित को योग्यता अनुसार चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी दी जाए।

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के एक मामले में पीड़ित परिवारों के हक में बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि दिवंगत पंचायत शिक्षक (शिक्षाकर्मी) का आश्रित शिक्षक पद की अनिवार्य योग्यता नहीं रखता है, तो केवल इसी तकनीकी आधार पर उसका आवेदन खारिज करना पूरी तरह अनुचित है। हाईकोर्ट ने दुर्ग जिला पंचायत के पुराने आदेश को रद्द करते हुए प्रशासन को आश्रित की योग्यता के अनुसार नौकरी देने का आदेश दिया है।

जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ का आदेश, 4 महीने में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ में हुई। अदालत ने प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वे याचिकाकर्ता की वर्तमान शैक्षणिक योग्यता की समीक्षा करें। इसके बाद विभाग में किसी भी स्वीकृत और रिक्त चतुर्थ श्रेणी (Class-4) पद पर याचिकाकर्ता को अनुकंपा नियुक्ति देने पर गंभीरता से विचार करें। हाईकोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को चार महीने के भीतर पूरा करने की समय-सीमा तय की है।

2015 में हुआ था पिता का निधन, नियमों के फेर में उलझा मामला

यह पूरा मामला दुर्ग जिले का है, जहां याचिकाकर्ता राकेश कुमार वर्मा (30 वर्ष) के पिता चमन लाल वर्मा ‘सहायक शिक्षक पंचायत’ के पद पर पदस्थ थे।

  • 15 अक्टूबर 2015: चमन लाल वर्मा का आकस्मिक निधन हो गया।
  • 23 सितंबर 2016: पीड़ित बेटे राकेश ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
  • 30 जुलाई 2018: प्रशासन ने योग्यता का हवाला देकर आवेदन को खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि विभाग की अनुकंपा नीतियां लगातार बदलती रहीं। साल 2014 के नियमों के तहत सीधे सहायक शिक्षक बनाया जा सकता था, जबकि 2016 में नियम बदलकर ‘ग्राम पंचायत सचिव’ के पद पर नियुक्ति का प्रावधान कर दिया गया, जिससे पीड़ित परिवार नियमों के जाल में उलझकर रह गया।

“मुख्य उद्देश्य संकट से उबारना है, तकनीकी आधार पर इनकार गलत”

हाईकोर्ट ने जिला पंचायत दुर्ग द्वारा जारी रिजेक्शन ऑर्डर को कानूनन गलत पाया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य घर के कमाऊ सदस्य को खो चुके पीड़ित परिवार को अचानक आए आर्थिक संकट से उबारना और सहायता प्रदान करना है। ऐसे में नीतियों और योग्यताओं के सख्त तकनीकी नियमों के कारण किसी परिवार को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

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