Delhi HC Decision: चुनावी आचार संहिता के दौरान राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक सही, दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Delhi HC Political Ad Ban: दिल्ली हाई कोर्ट ने आदर्श आचार संहिता (MCC) के दौरान दिल्ली मेट्रो में राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन नहीं है। जानिए पूरी खबर।
नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान राजनीतिक विज्ञापनों पर सीमित समय के लिए रोक लगाने से किसी भी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता है। इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) के साल 2019 के उस फैसले को पूरी तरह सही ठहराया, जिसके तहत आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू रहने के दौरान दिल्ली मेट्रो (DMRC) परिसर और ट्रेनों में राजनीतिक विज्ञापनों के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाया गया था।
विज्ञापन कंपनियों की याचिका खारिज, सिंगल जज के आदेश पर लगी मुहर
यह फैसला उन विज्ञापन कंपनियों की अपीलों को खारिज करते हुए आया है, जिनके पास दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की ट्रेनों और स्टेशनों पर विज्ञापन प्रदर्शित करने के कमर्शियल अधिकार हैं। याचिकाओं में जनवरी 2020 के एक सिंगल जज के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने जून 2019 में चुनाव आयोग द्वारा जारी उस निर्देश को वैध माना था, जिसमें आचार संहिता लागू होते ही मेट्रो संपत्तियों से सभी राजनीतिक विज्ञापनों को तुरंत हटाने की बात कही गई थी।
मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं: हाई कोर्ट
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी: याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि यह पाबंदी संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और 19(1)(g) (व्यापार करने का अधिकार) का उल्लंघन करती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि विज्ञापन कंपनियों पर बिजनेस करने को लेकर ‘कोई पूर्ण प्रतिबंध’ नहीं लगाया गया था। आचार संहिता के दौरान भी वे गैर-राजनीतिक और कमर्शियल विज्ञापन दिखाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र थे।
अदालत ने साफ किया कि चुनाव के दौरान निष्पक्षता बनाए रखने के लिए राजनीतिक विज्ञापनों पर लगाई गई यह सीमित अवधि की रोक पूरी तरह तार्किक है और इसे अधिकारों का हनन नहीं माना जा सकता।




