नो टेरर, नो टॉक: चीन-पाक सीमा विवाद पर सरकार का बड़ा बयान; संसदीय समिति के सामने खोली रिपोर्ट
भारत ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि आतंकवाद के खात्मे के बिना कोई सामान्य रिश्ता नहीं हो सकता। जानिए चीन और सिंधु जल संधि पर विदेश मंत्रालय की संसदीय समिति को दी गई पूरी रिपोर्ट।
नई दिल्ली. भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को लेकर अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने दोटूक शब्दों में कहा है कि जब तक सीमा पार से जारी आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक दोनों देशों के बीच सामान्य माहौल या लोगों के स्तर पर (People-to-People) संपर्क बहाल नहीं हो सकता। आरएसएस नेताओं की पाकिस्तान के साथ जुड़ाव बढ़ाने संबंधी हालिया टिप्पणियों के बीच सरकार का यह बड़ा बयान सामने आया है। संसद की स्थायी समिति की बैठक में विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंधों की मौजूदा स्थिति और सुरक्षा प्राथमिकताओं का पूरा लेखा-जोखा पेश किया।
आतंक के साए में बातचीत संभव नहीं: सरकार
विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति की बैठक में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी स्तर पर संपर्क तभी संभव है, जब आतंकवाद और हिंसा का डर पूरी तरह समाप्त हो जाए। मौजूदा हालातों को देखते हुए सरकार का मानना है कि फिलहाल ऐसा कोई अनुकूल वातावरण नहीं है, जिससे रिश्तों में सुधार की उम्मीद की जा सके।
ट्रैक-2 और ट्रैक-1.5 वार्ता पर भी लगी रोक
बैठक के दौरान अधिकारियों ने एक और बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत और पाकिस्तान के बीच ट्रैक-2 कूटनीतिक संवाद (बैकचैनल डिप्लोमेसी) से भी किसी सकारात्मक नतीजे की उम्मीद नहीं है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच इस समय ट्रैक-1.5 स्तर की भी कोई वार्ता नहीं चल रही है।
विदेश सचिव ने संसदीय समिति को दी पूरी रिपोर्ट
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली इस संसदीय समिति के सामने विदेश सचिव विक्रम मिसरी और अन्य अधिकारियों ने भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंधों पर विस्तार से जानकारी दी। ब्रीफिंग के बाद शशि थरूर ने कहा कि यह जानकारी समिति के आगामी जम्मू-कश्मीर, लेह और कारगिल दौरे से पहले काफी उपयोगी साबित होगी। उन्होंने भारत-चीन संबंधों को बेहद ‘संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण’ करार दिया।
चीन के साथ 35 दौर की वार्ता, पर विवाद बरकरार
कमेटी को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2020 से अब तक भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने के लिए 35 दौर की वार्ता हो चुकी है। यह बातचीत वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) और सैन्य कमांडरों के स्तर पर हुई है, जिसकी आखिरी बैठक 27 मई को बीजिंग में हुई थी। हालांकि सीमा पर फिलहाल शांति है, लेकिन लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के अवैध दावों पर भारत ने अपनी सख्त आपत्ति बरकरार रखी है।
चीन का अवैध कब्जा: विदेश मंत्रालय ने अपने नोट में दोहराया कि चीन अब भी लद्दाख में भारत के लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अवैध कब्जा किए हुए है और अरुणाचल के 90 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर दावा ठोकता है, जिसे भारत सिरे से खारिज करता है।
सिंधु जल संधि पर भी भारत का कड़ा स्टैंड
पाकिस्तान को घेरते हुए अधिकारियों ने बैठक में दोहराया कि भारत ने सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित रखा है। सरकार का रुख साफ है— जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक इस संधि को सामान्य रूप से लागू करने या इस पर आगे बढ़ने का सवाल ही नहीं उठता।




