मध्य प्रदेश

CM मोहन यादव का मास्टरस्ट्रोक: अस्पतालों में ‘गर्भ संस्कार’ कक्ष, 13 आयुर्वेदिक कॉलेजों की सौगात

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर में ‘दिव्य संतान प्रकल्प’ की घोषणा की। गर्भ संस्कार को बढ़ावा देने वाली यह पहल आयुष्मान भारत के तहत बच्चों के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास को सशक्त बनाएगी।

इंदौर. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश में एक नई स्वास्थ्य पहल की घोषणा की है। ‘दिव्य संतान प्रकल्प’ के तहत गर्भ संस्कार को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसका उद्देश्य बच्चों के जन्म से पहले ही उनके शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास को सुदृढ़ बनाना है। यह पहल आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आयुष मंत्रालय के सहयोग से लागू की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताए गर्भ संस्कार के फायदे

इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्भ संस्कार आने वाली पीढ़ी को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से मजबूत बनाने की एक समग्र प्रक्रिया है। उन्होंने इसे आधुनिक विज्ञान और भारतीय पारंपरिक ज्ञान का समन्वय बताते हुए कहा कि इसे राष्ट्र निर्माण में दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।

सरकारी अस्पतालों में बनेंगे विशेष कक्ष

मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि भविष्य में राज्य के सरकारी अस्पतालों के डिज़ाइन में गर्भ संस्कार के लिए अलग और विशेष कक्ष बनाना अनिवार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब एलोपैथी के डॉक्टर भी व्यापक प्रसव-पूर्व देखभाल (Comprehensive Antenatal Care) के लाभों को स्वीकार कर रहे हैं।

राज्य में खुलेंगे 13 नए आयुर्वेदिक कॉलेज

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सामान्य प्रसव को प्रोत्साहित किया जा रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में 13 नए आयुर्वेदिक कॉलेज खोले जाएंगे। आज़ादी के बाद यह पहला अवसर है जब इतनी बड़ी संख्या में आयुर्वेदिक कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें से 8 कॉलेज एक वर्ष के भीतर शुरू हो जाएंगे।

अभिमन्यु और अष्टावक्र का उदाहरण

गर्भ संस्कार की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने भारतीय परंपरा के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि अभिमन्यु और अष्टावक्र जैसे प्रसंग बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान ही संस्कार, ज्ञान और मूल्य ग्रहण किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान आयुर्वेद और एलोपैथी के समन्वय ने एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण की प्रभावशीलता को सिद्ध किया है। साथ ही पारंपरिक ग्रामीण जीवनशैली, भारतीय रसोई और स्वदेशी आहार के वैज्ञानिक महत्व पर भी उन्होंने जोर दिया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button