जाम की मार: देश को 1.47 लाख करोड़ का नुकसान, शहर ठप
टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2025: भारत में लोग हर साल 130 घंटे ट्रैफिक जाम में गंवा रहे हैं। बेंगलुरु दुनिया का दूसरा सबसे धीमा शहर, देश को 1.47 लाख करोड़ का नुकसान।

नई दिल्ली. ऑफिस, स्कूल या किसी अन्य काम के लिए घर से निकलते ही ट्रैफिक जाम में फंस जाना अब रोजमर्रा की समस्या बन चुका है। यह परेशानी किसी एक शहर या व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि देश की करीब 1.46 अरब आबादी इससे प्रभावित है।
नीदरलैंड की कंपनी TomTom की ताजा ट्रैफिक इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लोग हर साल औसतन 130 घंटे ट्रैफिक जाम में गंवा रहे हैं। वहीं, Boston Consulting Group (BCG) की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रैफिक जाम के कारण देश को सालाना करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है।
टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2025: भारत के 10 शहरों का हाल
टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2025 में भारत के 10 प्रमुख शहरों की यातायात व्यवस्था का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु दुनिया का दूसरा सबसे धीमा शहर बन गया है, जहां औसत यात्रा समय 3 मिनट 37 सेकंड प्रति किलोमीटर है।
टॉप-5 सबसे खराब ट्रैफिक वाले शहर, भारत के दो शहर शामिल
ट्रैफिक जाम के मामले में दुनिया के शीर्ष 5 शहरों की सूची में भारत के दो शहर शामिल हैं—
- मेक्सिको सिटी – पहला स्थान
- बेंगलुरु – दूसरा स्थान
- डबलिन – तीसरा स्थान
- लॉड्ज – चौथा स्थान
- पुणे – पांचवां स्थान
टॉप-5 में भारत के दो शहरों का होना शहरीकरण और निजी वाहनों पर बढ़ती निर्भरता की गंभीर चुनौती को दर्शाता है।
एशिया का सबसे धीमा शहर बना बेंगलुरु
ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार, बेंगलुरु एक बार फिर एशिया का सबसे धीमा शहर बन गया है। यहां सामान्य स्थिति में प्रति किमी यात्रा समय 2 मिनट 4 सेकंड रहता है, लेकिन व्यस्त समय में यह बढ़कर 3 मिनट 37 सेकंड हो जाता है। भीड़भाड़ के स्तर का स्कोर 74.4 दर्ज किया गया है, जो एक साल पहले 72.7 था।
दक्षिण भारत के शहरों में ट्रैफिक संकट ज्यादा गहरा
रिपोर्ट में शामिल 10 भारतीय शहरों—बेंगलुरु, पुणे, मुंबई, नई दिल्ली, कोलकाता, जयपुर, चेन्नई, हैदराबाद, एर्नाकुलम और अहमदाबाद—में से 7 शहर दक्षिण भारत से हैं। इससे संकेत मिलता है कि दक्षिणी राज्यों के शहरी इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था सबसे ज्यादा दबाव में है।
छोटे शहर भी जाम की चपेट में
मुंबई, नई दिल्ली और कोलकाता जैसे महानगरों के साथ-साथ जयपुर, चेन्नई और हैदराबाद जैसे उभरते शहरों में भी ट्रैफिक जाम की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एर्नाकुलम और अहमदाबाद जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहरों का रैंकिंग में शामिल होना दर्शाता है कि समस्या अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही।
बेंगलुरु में 10 किमी की दूरी तय करने में 36 मिनट
बेंगलुरु में औसतन 15 मिनट में केवल 4.2 किमी की दूरी तय हो पाती है। यानी 10 किमी की दूरी तय करने में 36.09 मिनट लग रहे हैं। व्यस्त समय में औसत गति घटकर 13.9 किमी/घंटा रह गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में और धीमी है।
ट्रैफिक जाम के प्रमुख कारण
- निजी वाहनों की बढ़ती संख्या: आय बढ़ने के साथ निजी वाहन तेजी से बढ़े
- सड़कों का रेडियल डिजाइन: सीबीडी क्षेत्रों में भीड़ अधिक
- पार्किंग की कमी: ऑन-स्ट्रीट पार्किंग से जाम बढ़ता है
यातायात नियमों की जानकारी का अभाव
- ट्रैफिक जाम से निपटने के उपाय
- सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा
- कार पूलिंग और शेयरिंग सिस्टम
- फ्लाईओवर, बाईपास और रिंग रोड
- स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था
ट्रैफिक जाम से बढ़ता प्रदूषण और स्वास्थ्य खतरा
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, ट्रैफिक जाम से पार्टिकुलेट मैटर (PM) में 30% तक वृद्धि हो सकती है।
जाम के दौरान निकलने वाला धुआं चलती गाड़ियों की तुलना में 3 से 7 गुना अधिक प्रदूषण फैलाता है, जिससे NO₂, CO और VOCs जैसी हानिकारक गैसें वातावरण में बढ़ जाती हैं।
लोग ट्रैफिक में कितने घंटे गंवा रहे हैं?
टॉमटॉम और सीएसई की रिपोर्ट के अनुसार—
- बेंगलुरु: 168 घंटे/वर्ष
- पुणे: 152 घंटे
- मुंबई: 126 घंटे
- नई दिल्ली: 104 घंटे
- कोलकाता: करीब 150 घंटे
कैसे काम करता है टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स?
करीब 15 वर्षों से टॉमटॉम अपने डिजिटल मैप्स, नेविगेशन सॉफ्टवेयर और रियल-टाइम डेटा के जरिए दुनिया के 492 शहरों में ट्रैफिक पैटर्न का अध्ययन कर रहा है। इसी डेटा के आधार पर हर साल ट्रैफिक इंडेक्स रिपोर्ट जारी की जाती है।




