बजट इतिहास का टर्निंग पॉइंट: 92 साल की परंपरा तोड़ने वाला फैसला
1 फरवरी 2026 को निर्मला सीतारमण पेश करेंगी लगातार 9वां बजट। जानिए कैसे मोदी सरकार ने 92 साल पुरानी रेल बजट परंपरा खत्म कर आम बजट में किया विलय।

नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी 2026 को देश का आम बजट पेश करेंगी। मंत्री के रूप में यह उनका लगातार नौवां बजट होगा। उन्होंने अपना पहला बजट 5 जुलाई 2019 को प्रस्तुत किया था। मोदी सरकार के कार्यकाल में बजट प्रक्रिया से जुड़ी कई परंपराओं में बदलाव हुए हैं, जिनमें सबसे अहम बदलाव रेल बजट से जुड़ा रहा है।
92 साल पुरानी परंपरा में हुआ ऐतिहासिक बदलाव
भारतीय बजट इतिहास पर नजर डालें तो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान कई बड़े सुधार किए गए। इन्हीं में से एक था रेल बजट और आम बजट को अलग-अलग पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा को समाप्त करना।
आम बजट में रेल बजट का विलय
मोदी सरकार ने वर्ष 2017 में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए रेल बजट और आम बजट को मर्ज कर दिया। इसके बाद से Union Budget और Rail Budget को अलग-अलग पेश करने की परंपरा खत्म हो गई और दोनों को एक साथ संसद में प्रस्तुत किया जाने लगा।
पहले कैसे पेश होते थे बजट?
2017 से पहले तक देश में हर साल दो बजट पेश किए जाते थे—
- आम बजट (Union Budget): शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा और आर्थिक विकास से जुड़ी घोषणाएं
- रेल बजट (Rail Budget): रेलवे से संबंधित योजनाएं और घोषणाएं
- रेल बजट आम बजट से एक दिन पहले संसद में पेश किया जाता था।
1924 से चली आ रही थी रेल बजट की परंपरा
रेल बजट पहली बार वर्ष 1924 में ब्रिटिश शासन के दौरान पेश किया गया था। इसके बाद करीब एक सदी तक यह परंपरा जारी रही। हालांकि 2017 में सरकार ने इस व्यवस्था को बदलते हुए दोनों बजटों को एक कर दिया। इसके बाद से संसद में 1 फरवरी को सुबह 11 बजे केवल एक ही बजट पेश किया जाने लगा।
अरुण जेटली ने पेश किया पहला कॉमन बजट
रेल बजट और आम बजट के विलय के बाद पहला कॉमन बजट संसद में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष 2017 में प्रस्तुत किया था। इस बदलाव की सिफारिश नीति आयोग ने की थी, जिसने ब्रिटिश काल से चली आ रही इस परंपरा को समाप्त करने की सलाह सरकार को दी थी।
बजट प्रक्रिया में सुधार की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना रहा है कि रेल बजट को आम बजट में शामिल करने से संसाधनों का बेहतर उपयोग, योजना निर्माण में एकरूपता और रेलवे के समग्र विकास को गति मिली है। 2026 का आम बजट भी इसी निरंतरता का हिस्सा होगा।




