मध्य प्रदेश

इको-सिस्टम को राहत: Indore में सफेद गिद्धों की संख्या में उछाल

इंदौर में सफेद गिद्ध (इजिप्शियन वल्चर) की वापसी। NWCS सर्वे में संख्या बढ़कर 15 हुई, कचरा प्रबंधन और संरक्षण पर जोर।

इंदौर. इंदौर के आकाश से लगभग गायब हो चुकी इजिप्शियन वल्चर (सफेद गिद्ध) की प्रजाति एक बार फिर शहर के बाहरी इलाकों में दिखाई देने लगी है। नेचर एंड वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन एंड अवेयरनेस सोसायटी (NWCS) द्वारा किए गए हालिया सर्वे में यह सकारात्मक संकेत सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, सफेद गिद्ध विशेष रूप से देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड और कंपेल क्षेत्र के आसपास उड़ान भरते देखे गए हैं।

सर्वे के आंकड़ों में सुधार, संख्या बढ़कर 15 हुई

देवगुराड़िया पहाड़ी क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से सफेद गिद्धों का प्राकृतिक वास रहा है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में इनकी संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। NWCS हर वर्ष दिसंबर–जनवरी में गिद्धों की गणना करता है। इस बार करीब डेढ़ महीने तक चले सर्वे के बाद 15 सफेद गिद्धों की पहचान की गई है।

  • पिछले वर्ष: 8 गिद्ध
  • इस वर्ष: 15 गिद्ध
  • 9 वर्ष पहले: 83 गिद्ध

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुधार भले ही राहत देने वाला हो, लेकिन अब भी संख्या पुराने स्तर से काफी कम है।

गिद्ध संरक्षण के लिए नगर निगम को सौंपा जाएगा प्रस्ताव

गिद्धों के संरक्षण को लेकर NWCS अब ठोस पहल की तैयारी में है। संस्था के अध्यक्ष रवि शर्मा के अनुसार, संस्था की योजना है कि इंदौर नगर निगम मौजूदा डंपिंग यार्ड के अलावा शहर से 15–20 किलोमीटर दूर एक ऐसा स्थान चिन्हित करे, जहां खुले में कचरे की प्रोसेसिंग की जा सके। इससे:

  • गिद्धों को प्राकृतिक भोजन मिल सकेगा
  • कचरे में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया के निस्तारण में मदद मिलेगी
  • इस संबंध में जल्द ही नगर निगम आयुक्त को औपचारिक प्रस्ताव सौंपा जाएगा।

कचरा प्रबंधन और गिद्धों की आबादी का सीधा संबंध

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्षों में सफेद गिद्धों की संख्या घटने का प्रमुख कारण खुले क्षेत्रों में कचरा डंपिंग का बंद होना रहा। सफेद गिद्ध कचरे और मृत जीवों से भोजन प्राप्त करते हैं। भोजन की कमी के चलते इन्हें अन्य क्षेत्रों की ओर पलायन करना पड़ा। हालांकि, बीते दो वर्षों में भोजन की उपलब्धता में हल्का सुधार होने से इनकी संख्या फिर बढ़ने लगी है।

भविष्य को लेकर चेतावनी

वन्यजीव प्रेमियों ने आगाह किया है कि यदि आने वाले समय में कचरा प्रबंधन पूरी तरह कवर्ड प्रोसेसिंग प्लांट्स तक सीमित हो गया, तो सफेद गिद्धों के अस्तित्व पर एक बार फिर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button