देश

मौसम का अलार्म: बद्रीनाथ–केदारनाथ में 40 साल बाद नहीं जमी बर्फ, चिंता बढ़ी

उत्तराखंड में इस सर्दी बर्फबारी लगभग शून्य रही। तुंगनाथ में 1985 के बाद पहली बार जनवरी में बर्फ नहीं जमी। वैज्ञानिक इसे स्नो ड्राउट बता रहे हैं, पश्चिमी विक्षोभ कमजोर।

उत्तराखंड. उत्तराखंड में इस सर्दी ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी लगभग न के बराबर रही है। अक्टूबर से जनवरी के बीच हिमपात का रिकॉर्ड लगभग शून्य दर्ज किया गया। रुद्रप्रयाग जिले के प्रसिद्ध तुंगनाथ क्षेत्र में जनवरी माह में बर्फ नहीं जमी—जो 1985 के बाद पहली बार हुआ है। इसी तरह बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में भी इस बार सामान्य जनवरी हिमपात नहीं हुआ।

गूंजी तक नहीं दिखी बर्फ, हिल स्टेशनों पर भी सूखा मौसम

पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ लोकप्रिय हिल स्टेशन—नैनीताल, मसूरी और मुक्तेश्वर—में भी इस बार बर्फबारी नहीं हुई। हैरानी की बात यह है कि लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई वाले गूंजी क्षेत्र में भी बर्फ नहीं जमी।

ग्लोबल वार्मिंग की ओर इशारा, ‘स्नोलेस एरिया’ का खतरा

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बर्फबारी न होने का प्रमुख कारण ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन है। बढ़ते तापमान के चलते पूरा प्रदेश धीरे-धीरे “स्नोलेस एरिया” की ओर बढ़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान हिमालयी पारिस्थितिकी, जल स्रोतों, कृषि और पर्यटन पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ीं, पारिस्थितिकी पर दबाव

बर्फ के अभाव का सीधा असर यह भी पड़ा है कि पहाड़ों में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ने लगी हैं—जो सामान्यतः गर्मियों में देखी जाती थीं। नासा की सैटेलाइट तस्वीरों में केदारनाथ की पहाड़ियां जनवरी में असामान्य रूप से सूखी नजर आ रही हैं। बद्रीनाथ क्षेत्र में भी अब तक बर्फ नहीं पड़ी है। वैज्ञानिक इस स्थिति को “स्नो ड्राउट (बर्फ का अकाल)” करार दे रहे हैं, जो उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहा है।

कमजोर रहा पश्चिमी विक्षोभ, 21 जनवरी तक उम्मीद

इस सर्दी में पश्चिमी विक्षोभ (वेदर सिस्टम) भी कमजोर रहा। सामान्यतः सर्दियों में चार–पांच पश्चिमी विक्षोभ उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी लाते हैं, लेकिन इस बार बने सिस्टम कमजोर होकर राज्य से पहले ही दक्षिण की ओर मुड़ गए।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, कश्मीर के दक्षिण-पूर्व में सक्रिय एक पश्चिमी विक्षोभ 21 जनवरी तक उत्तराखंड पहुंच सकता है। यदि यह सिस्टम मजबूत होता है, तो राज्य में बर्फबारी की संभावना बन सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button