मध्य प्रदेश

फिर चर्चा में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री, CM मोहन यादव ने किया दौरा

भोपाल में सीएम डॉ. मोहन यादव ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का औचक निरीक्षण किया। 85 एकड़ परिसर, गैस राहत विभाग से चर्चा और 337 टन जहरीले कचरे के निपटान के बाद की स्थिति पर फोकस।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को अचानक यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर पहुंचे। यह वही स्थान है, जहां दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदियों में से एक भोपाल गैस कांड हुआ था। सीएम ने फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद गैस राहत विभाग के अधिकारियों से काफी देर तक विस्तृत चर्चा की। फैक्ट्री करीब 85 एकड़ जमीन में फैली हुई है।

इस निरीक्षण से एक दिन पहले शुक्रवार को भोपाल जिला प्रशासन और गैस राहत विभाग के अधिकारियों ने फैक्ट्री और जमीन से संबंधित दस्तावेजों व फाइलों की समीक्षा की थी।

पिछले साल पीथमपुर भेजा गया था 337 टन जहरीला कचरा

यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में करीब 40 वर्षों से पड़ा 337 टन जहरीला कचरा जनवरी 2025 में पीथमपुर भेजा गया था। इस कचरे को 12 कंटेनरों में भरकर स्थानांतरित किया गया और वहां वैज्ञानिक प्रक्रिया से नष्ट किया गया। कचरे के निपटान को लेकर पीथमपुर में कड़ा विरोध भी हुआ, लेकिन अंततः कचरे और उसकी राख को सुरक्षित तरीके से दफन कर दिया गया।

भोपाल गैस त्रासदी: आज भी रूह कंपा देती है याद

गौरतलब है कि भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक मानी जाती है। 2 और 3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात जेपी नगर क्षेत्र में स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के टैंक नंबर 610 से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था।

उस रात के दृश्य आज भी लोगों को झकझोर देते हैं। चश्मदीदों और उस दौर के पत्रकारों के अनुसार, चारों ओर लाशें बिछी हुई थीं, शवों को ढोने के लिए वाहन कम पड़ गए थे और अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियों तक की कमी हो गई थी। इस हादसे ने भोपाल ही नहीं, पूरी दुनिया को हिला दिया था।

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