वाराणसी में स्वाइन फ्लू पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में 125 बेड रिजर्व
वाराणसी में स्वाइन फ्लू का कोई सक्रिय केस नहीं है, फिर भी स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां बढ़ा दी हैं। अस्पतालों में 125 बेड रिजर्व, अलग फ्लू ओपीडी और मेडिकल संसाधनों की व्यवस्था की गई है।
वाराणसी: जिले में फिलहाल स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा-एच1एन1 का कोई सक्रिय मामला नहीं है, लेकिन दूसरे जिलों में सामने आ रहे मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। सरकारी अस्पतालों में सोमवार से फ्लू के मरीजों के लिए अलग ओपीडी संचालित की जाएगी। मरीजों के प्रवेश की व्यवस्था भी अलग रखने की तैयारी है, ताकि संक्रमण के संभावित प्रसार को नियंत्रित किया जा सके।
अस्पतालों में 125 बेड आरक्षित
स्वाइन फ्लू के संभावित मरीजों के उपचार के लिए जिले के सरकारी अस्पतालों में कुल 125 बेड आरक्षित किए गए हैं। बीएचयू में 25 बेड, जबकि मंडलीय, जिला और एलबीएस अस्पतालों में 15-15 बेड की व्यवस्था की गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी तीन-तीन बेड आरक्षित किए गए हैं। मरीजों के इलाज में तैनात डॉक्टरों और फ्रंटलाइन स्टाफ की सुरक्षा के लिए एच1एन1 टीकाकरण भी कराया जाएगा।
अप्रैल से अब तक चार मामले
सीएमओ डॉ. एनपी सिंह के मुताबिक वाराणसी में अप्रैल से अब तक स्वाइन फ्लू के चार मामले सामने आए हैं और सभी मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में जिले में कोई एक्टिव केस नहीं है। उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और डॉक्टरों को लक्षण वाले मरीजों की तत्काल जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बीएचयू में होगी आरटीपीसीआर जांच
स्वाइन फ्लू की आरटीपीसीआर जांच बीएचयू में उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग ने लक्षण वाले मरीजों को जांच कराने की सलाह दी है। वहीं निजी पैथोलॉजी सेंटरों को जांच के नाम पर मनमानी फीस नहीं वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत मिलने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को मरीजों से जुड़ी आवश्यक जानकारी निर्धारित पोर्टल पर समय से अपलोड करने के निर्देश भी दिए हैं।
ऑक्सीजन प्लांट और मेडिकल संसाधनों की जांच
स्वास्थ्य विभाग ने संभावित स्थिति से निपटने के लिए जिले के 22 ऑक्सीजन प्लांट की जांच कराई है। शनिवार को इन प्लांटों का निरीक्षण किया गया। इसके अलावा ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, मास्क और सैनिटाइजर समेत जरूरी संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और उपचार व्यवस्था को मजबूत रखने पर जोर दिया जा रहा है।
खांसी-छींक से फैल सकता है संक्रमण
स्वाइन फ्लू एक संक्रामक श्वसन रोग है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने के दौरान निकलने वाली श्वसन बूंदों के संपर्क में आने से फैल सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान और कमजोरी शामिल हैं। कुछ मरीजों में उल्टी या दस्त की समस्या भी सामने आ सकती है।
बचाव के लिए सावधानी जरूरी
संक्रमण से बचने के लिए खांसते या छींकते समय नाक और मुंह ढकना, नियमित रूप से हाथ धोना और जरूरत पड़ने पर सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना उपयोगी है। बुखार या सांस से जुड़े लक्षण होने पर भीड़भाड़ से दूरी बनाए रखना और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचना जरूरी है। इस्तेमाल किए गए टिश्यू को खुले में नहीं फेंकना चाहिए। पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन करें तथा बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं या एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करें।




