PM मोदी के पंजाब दौरे से पहले खालिस्तान समर्थक गतिविधियों से बढ़ी सतर्कता, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
PM नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित पंजाब दौरे से पहले खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के कथित वीडियो पर जांच तेज हो गई है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं, जबकि फिल्म 'सतलुज' को लेकर भी राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है।
चंडीगढ़. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित पंजाब दौरे से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दिल्ली जाने वाली एक ट्रेन पर खालिस्तान समर्थक नारे लिखे होने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि यह ट्रेन फिरोज कैंट रेलवे स्टेशन पर दिखाई दे रही है। यह वीडियो अलगाववादी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया बताया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वीडियो में जसवंत सिंह खालड़ा का भी जिक्र
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो कथित तौर पर एसएफजे प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा साझा किया गया, जिसमें मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का उल्लेख किया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री के प्रस्तावित पंजाब दौरे के दौरान खालिस्तानी झंडे प्रदर्शित करने की अपील किए जाने का भी दावा किया गया है। हाल के दिनों में खालड़ा पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसके कारण यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है।
फिरोज कैंट स्टेशन पर जांच अभियान तेज
वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने फिरोज कैंट रेलवे स्टेशन पर जांच शुरू कर दी है। स्टेशन और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि ट्रेन पर नारे लिखने वालों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही घटनास्थल से फॉरेंसिक साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए रेलवे स्टेशन, संवेदनशील इलाकों और कार्यक्रम स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
15 से 17 जुलाई के बीच प्रस्तावित है पंजाब दौरा
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 17 जुलाई के बीच पंजाब के दौरे पर आ सकते हैं। इस दौरान उनके लुधियाना और जालंधर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना है। जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन के उद्घाटन के साथ-साथ चंडीगढ़ में भी कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किए जाने की तैयारी बताई जा रही है। दौरे को लेकर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम शुरू कर दिए हैं।
‘सतलुज’ फिल्म पर भी तेज हुआ विवाद
इस बीच केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर ऐतिहासिक घटनाओं को स्थापित तथ्य की तरह प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से उन सभी दस्तावेजों, सरकारी रिकॉर्ड, न्यायिक निष्कर्षों और प्रमाणित साक्ष्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है, जिनके आधार पर फिल्म में हजारों लोगों के लापता होने और कथित गैर-कानूनी अंतिम संस्कार जैसे दावे दिखाए गए हैं। बिट्टू ने यह भी कहा कि यदि संबंधित आंकड़े केवल आरोप या अनुमान हैं, तो उन्हें अंतिम ऐतिहासिक सत्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं माना जा सकता।
फिल्म हटने के बाद और बढ़ी बहस
निर्देशक हनी त्रेहन की फिल्म ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके अभियान पर आधारित है। फिल्म में 1984 से 1994 के बीच कथित अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को दर्शाया गया है। रिलीज के कुछ समय बाद इसे भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिसके बाद फिल्म, उसके दावों और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है।




