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SIR रिपोर्ट से हड़कंप: पश्चिम बंगाल में अब तक इतने अवैध मतदाता मिले

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के तहत 11 हजार से अधिक अवैध मतदाता चिन्हित, नदिया में सबसे ज्यादा मामले। दूसरे चरण की सुनवाई जारी, राजनीतिक बहस तेज।

बंगाल. पश्चिम बंगाल सरकार ने बताया है कि राज्य में मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़ी सुनवाई के दौरान अब तक 11,000 से अधिक अवैध मतदाताओं की पहचान की जा चुकी है। सबसे ज्यादा मामले नदिया जिले से सामने आए हैं, जबकि बांकुड़ा और दक्षिण कोलकाता में एक भी अवैध मतदाता नहीं मिला। राज्य सरकार द्वारा मंगलवार को जारी इन आंकड़ों पर फिलहाल निर्वाचन आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

9.30 लाख मतदाताओं की सुनवाई पूरी

राज्य सरकार के अनुसार, एसआईआर के तहत जिन इलाकों में मतदाता सूचियों में तार्किक विसंगतियां पाई गई थीं, वहां सुनवाई की जा रही है। अब तक 9,30,993 मतदाताओं की सुनवाई पूरी हो चुकी है और उनकी जानकारियां ऑनलाइन अपलोड की जा चुकी हैं। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) ने 11,472 मतदाताओं को अवैध घोषित किया है, जिनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे।

65 लाख से अधिक नोटिस तैयार

अधिकारियों ने बताया कि मतदाता सूची को शुद्ध करने के उद्देश्य से शुरू की गई एसआईआर प्रक्रिया में अब तक पूरे राज्य में 65,78,058 नोटिस तैयार किए गए हैं। इनमें से 32,49,091 नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं। जिन 9,30,993 मतदाताओं को नोटिस मिला था, उनकी सुनवाई पूरी होने के बाद अवैध मतदाताओं की पहचान संभव हो पाई है।

जिला-वार आंकड़े: नदिया शीर्ष पर

जिला-वार आंकड़ों के मुताबिक, सुनवाई के बाद नदिया जिले में सबसे अधिक 9,228 अवैध मतदाता पाए गए हैं। इसके विपरीत दक्षिण कोलकाता और बांकुड़ा में एक भी अवैध मतदाता नहीं मिला, जबकि वहां क्रमशः 1,36,561 और 1,63,357 नोटिस जारी किए गए थे। अन्य जिलों में पाए गए अवैध मतदाताओं की संख्या इस प्रकार है—

  • कूचबिहार: 10
  • जलपाईगुड़ी: 4
  • दार्जिलिंग: 2
  • उत्तर दिनाजपुर: 2
  • दक्षिण दिनाजपुर: 195
  • मालदा: 15
  • मुर्शिदाबाद: 68
  • उत्तर 24 परगना: 147
  • दक्षिण 24 परगना: 69
  • उत्तर कोलकाता: 54
  • हावड़ा: 26
  • हुगली: 989
  • पूर्व मेदिनीपुर: 2
  • पश्चिम मेदिनीपुर: 105
  • पुरुलिया: 44
  • पूर्व बर्धमान: 167
  • बीरभूम: 264
  • अलीपुरद्वार: 9
  • कालिम्पोंग: 65
  • झाड़ग्राम: 3
  • पश्चिम बर्धमान: 4

राजनीतिक मुद्दा बनी एसआईआर प्रक्रिया

एसआईआर प्रक्रिया राज्य में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। विपक्षी दलों का दावा है कि इससे फर्जी मतदाताओं की पहचान होगी, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रक्रिया और इसके तरीकों पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य सरकार द्वारा जारी ये ताजा आंकड़े इस बहस को और तेज करेंगे।

पहले चरण में 58 लाख नाम हटे

एसआईआर के पहले चरण के पूरा होने के बाद 16 दिसंबर को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई थी। यानी करीब 58 लाख नाम सूची से हटाए गए। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, नाम हटाने के प्रमुख कारणों में मृत्यु, स्थायी पलायन, दोहराव और गणना फॉर्म जमा न करना शामिल है।

दूसरा चरण जारी

एसआईआर का दूसरा चरण फिलहाल जारी है, जिसमें 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई हो रही है। इनमें 1.36 करोड़ मतदाता तार्किक विसंगतियों के कारण जांच के दायरे में हैं, जबकि करीब 31 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड की मैपिंग में गड़बड़ी पाई गई है। अब सबकी नजर अंतिम मतदाता सूची पर टिकी है, जिसमें अवैध मतदाताओं की संख्या में बदलाव संभव माना जा रहा है।

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