विक्रमोत्सव-2026 की तैयारी तेज, मुख्यमंत्री ने समत्व भवन में ली समीक्षा बैठक
विक्रमोत्सव-2026 को भव्य और राष्ट्रीय स्वरूप देने के निर्देश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में तैयारियों की समीक्षा की, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और वैज्ञानिक आयोजनों पर जोर।

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सम्राट विक्रमादित्य के साहस, शौर्य और सृजनशीलता ने शौर्य व संगठन के नए प्रतिमान स्थापित किए और भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित विक्रमोत्सव-2026 में उनके व्यक्तित्व के सभी आयामों का प्रभावी और गरिमामय प्रकटीकरण सुनिश्चित किया जाए।
नई पीढ़ी तक पहुंचे सम्राट विक्रमादित्य का गौरव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक योगदान से परिचित कराना भारतीय ज्ञान परंपरा की निरंतरता के लिए आवश्यक है। विक्रमोत्सव देश और प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत व सांस्कृतिक चेतना का प्रभावशाली प्रतीक है। उन्होंने निर्देश दिए कि आयोजन पूर्ण भव्यता, सुव्यवस्था और सांस्कृतिक गरिमा के उच्चतम मानकों के अनुरूप किया जाए।
उज्जैन में तैयारियों की समीक्षा, विभागीय समन्वय पर जोर
मुख्यमंत्री ने उज्जैन में होने वाले विक्रमोत्सव-2026 की तैयारियों को लेकर समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में बैठक कर आयोजन की समग्र रूपरेखा, व्यवस्थाओं और विभागीय समन्वय की विस्तार से समीक्षा की।
राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर होंगे सांस्कृतिक आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों के प्रमुख नगरों में भी किया जाए। स्कूल-कॉलेजों में सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि उज्जैन में कृषक कल्याण वर्ष-2026 के अंतर्गत आयोजित विक्रमोत्सव में कृषि आधारित प्रदर्शनियां, प्राकृतिक खेती, नरवाई प्रबंधन, दुग्ध उत्पादक पशुओं की प्रतियोगिता और उद्यानिकी को प्रोत्साहित करने वाली गतिविधियां शामिल की जाएं।
वैज्ञानिक और शैक्षणिक सहभागिता पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़े आयोजनों में विज्ञान महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण को भारत सरकार की सहभागिता के साथ राष्ट्रीय स्वरूप देने पर भी बल दिया गया।
विक्रमोत्सव-2026: प्रमुख कार्यक्रमों का कार्यक्रम
15 फरवरी 2026: शिवार्चन, शिवरात्रि मेलों का शुभारंभ, कलश यात्रा, विक्रमोत्सव उद्घाटन, शिवोऽहम (प्रीतम एवं बैंड), शिवनाद
प्रदर्शनियां: विक्रमादित्य और अयोध्या, आर्ष भारत, अस्त्र-शस्त्र, 84 महादेव, जनजातीय देवलोक
विक्रम व्यापार मेला
- 16–20 फरवरी: शिव पुराण कथा
- 16–25 फरवरी: विक्रम नाट्य समारोह (राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय नाट्य प्रस्तुतियां)
- 26–28 फरवरी: अंतर्राष्ट्रीय इतिहास समागम, पुतुल समारोह, शोध संगोष्ठी
- 28 फरवरी–1 मार्च: विक्रमादित्य का न्याय – वैचारिक समागम
- 2 मार्च: अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
- 7 मार्च: लोकरंजन – विभिन्न बोलियों में कवि सम्मेलन
- 10–12 मार्च: संगीत के उद्भव और विकास पर अनहद समागम
- 13–14 मार्च: अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी
- 13–17 मार्च: पौराणिक फिल्मों का अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव (20+ देशों की फिल्में)
- 17–18 मार्च: भारतीय विज्ञान शोध संगोष्ठी
- 18 मार्च: वेद अंताक्षरी
- 19 मार्च: गुड़ी पड़वा पर सूर्योपासना, रामघाट
- उज्जयिनी गौरव दिवस – 19 मार्च
वर्ष प्रतिपदा व सृष्टि आरंभ दिवस को उज्जयिनी गौरव दिवस के रूप में मनाया जाएगा। शिप्रा तट पर मुख्य कार्यक्रम होगा, जिसमें सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण, विक्रम पंचांग 2082-83 एवं आर्ष भारत (द्वितीय संस्करण) का लोकार्पण, महादेव की नदी कथा-नृत्य नाट्य की प्रस्तुति और सुप्रसिद्ध गायक सोनू निगम की संगीतमय प्रस्तुति होगी। इस अवसर पर भव्य आतिशबाजी भी की जाएगी। गुड़ी पड़वा पर प्रदेश के सभी जिलों में विक्रमोत्सव का आयोजन होगा।




