उत्तर प्रदेशराज्य

योगी सरकार का आदेश: मकान मालिक–किरायेदार विवादों में मिली अहम राहत

यूपी में योगी सरकार का बड़ा फैसला—किराया एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन और पैतृक संपत्ति बंटवारा हुआ आसान व सस्ता। 90% तक शुल्क में कटौती से मकान मालिक और किरायेदारों को राहत।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने किराया रजिस्ट्रेशन और पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े नियमों को सरल और बेहद सस्ता कर दिया है। सरकार का दावा है कि इस फैसले से मकान मालिक, किरायेदार और पारिवारिक संपत्ति विवादों से जूझ रहे लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। इससे न सिर्फ समय और पैसा बचेगा, बल्कि पारदर्शिता बढ़ेगी और लंबे समय से चले आ रहे विवादों में भी कमी आएगी।

किराया एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन अब 90% तक सस्ता

योगी सरकार ने रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण को लेकर बड़ा सुधार किया है। अब तक अधिक स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क के कारण लोग रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन नहीं कराते थे और कच्चे समझौतों पर निर्भर रहते थे, जिससे बाद में विवाद खड़े हो जाते थे।
नई व्यवस्था में स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क में 90 प्रतिशत तक की कटौती की गई है। किराया अवधि और वार्षिक किराये की श्रेणियों के आधार पर शुल्क तय किया गया है, जो पहले की तुलना में काफी कम है। इससे अब आम नागरिक बिना झिझक अपना रेंट एग्रीमेंट पंजीकृत करा सकेगा।

मकान मालिक और किरायेदार—दोनों को फायदा

रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट से मकान मालिक को किराया समय पर मिलने और तय अवधि के बाद मकान खाली कराने की कानूनी सुरक्षा मिलेगी। वहीं किरायेदार को मनमानी किराया वृद्धि या जबरन बेदखली जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, कच्चे समझौतों पर रोक लगेगी और अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी घटेगा।

पैतृक संपत्ति के बंटवारे में बड़ी सहूलियत

योगी सरकार ने पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है। अब पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री सिर्फ 10 हजार रुपये में कराई जा सकेगी।

इसमें 5,000 रुपये स्टांप ड्यूटी और 5,000 रुपये निबंधन शुल्क शामिल होगा। पहले इसी प्रक्रिया में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का खर्च आ जाता था, जिससे लोग कानूनी बंटवारे से बचते थे।

किन संपत्तियों पर लागू होगा नया नियम

यह सुविधा केवल पैतृक अचल संपत्ति पर लागू होगी। इसमें कृषि भूमि, आवासीय और वाणिज्यिक संपत्ति शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संपत्ति का बंटवारा उत्तराधिकार कानून के तहत प्राप्त हिस्से के अनुपात में ही किया जाएगा। यह व्यवस्था तीन पीढ़ियों से अधिक पारंपरिक वंशजों के बीच लागू होगी, जिससे बड़े संयुक्त परिवारों को विशेष लाभ मिलेगा।

विवाद घटाने और कानून व्यवस्था मजबूत करने की पहल

उत्तर प्रदेश में पारिवारिक संपत्ति और किराये से जुड़े विवाद लंबे समय से एक बड़ी सामाजिक समस्या रहे हैं। योगी सरकार का मानना है कि बंटवारे और रजिस्ट्रेशन की सस्ती व सरल प्रक्रिया से लोग समय रहते कानूनी रास्ता अपनाएंगे, जिससे विवाद पैदा ही नहीं होंगे।

सरकार इसे ईज ऑफ डूइंग लिविंग की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जिससे आम नागरिकों के रोजमर्रा के कानूनी काम आसान होंगे और कानून व्यवस्था भी मजबूत होगी।

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