पर्यावरण पर लापरवाही भारी! उज्जैन के सप्त सागरों की बदहाली पर एनजीटी नाराज़
उज्जैन के ऐतिहासिक सप्त सागरों की बिगड़ती हालत पर एनजीटी नाराज, प्रदूषण और अतिक्रमण को लेकर अधिकारियों से मांगा जवाब।

उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित ऐतिहासिक सप्त सागरों (जलाशयों) की लगातार बिगड़ती स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ी नाराजगी जताई है। ट्रिब्यूनल ने जलाशयों में बढ़ते प्रदूषण, गाद जमाव और रखरखाव की कमी को गंभीर पर्यावरणीय चिंता बताया है।
रिपोर्ट्स पर असंतोष, कार्रवाई में देरी पर सवाल
एनजीटी ने सुनवाई के दौरान प्रस्तुत रिपोर्ट्स पर असंतोष जताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सुधार के ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। ट्रिब्यूनल ने संबंधित विभागों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि अब तक सप्त सागरों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
प्रदूषण और अतिक्रमण से बिगड़ रही हालत
एनजीटी के अनुसार, सप्त सागरों में घरेलू अपशिष्ट, गंदे नालों का पानी और अतिक्रमण के कारण जल गुणवत्ता लगातार गिर रही है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी शहर की पहचान प्रभावित हो रही है।
स्थानीय प्रशासन को समयबद्ध कार्ययोजना के निर्देश
ट्रिब्यूनल ने नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसमें जलाशयों की सफाई, गाद हटाने, सीवेज के समुचित प्रबंधन और अतिक्रमण हटाने जैसे बिंदुओं को शामिल करने को कहा गया है।
अगली सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य
एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई में केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। निर्धारित निर्देशों का पालन नहीं होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।




