उत्तर प्रदेश

योगी मॉडल का असर! छोटे उद्योगों को मिली गति, अर्थव्यवस्था को मिला बूस्ट

योगी आदित्यनाथ सरकार की सरल नीतियों और मजबूत कानून व्यवस्था ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि उत्तर प्रदेश में छोटे उद्योगों को नई गति मिली है।

लखनऊ. योगी आदित्यनाथ सरकार की सरल नीतियों और मजबूत कानून व्यवस्था ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि उत्तर प्रदेश में छोटे उद्योगों को नई गति मिली है। वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जो लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2029-30 तक उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना सरकार का लक्ष्य है। इसी दिशा में छोटे उद्योगों को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

2017 की चुनौतियों से निकलकर उद्योगों का नया दौर

वर्ष 2017 में सरकार गठन के समय प्रदेश में औद्योगिक प्रक्रियाएं बेहद जटिल थीं और निवेशकों का भरोसा भी कमजोर था। योगी सरकार ने—

  • समयबद्ध मंजूरी व्यवस्था,
  • सिंगल विंडो (एकल खिड़की) प्रणाली,
  • और जिलों में निवेश अनुकूल माहौल तैयार कर इस स्थिति को तेजी से बदला।
  • आज उत्तर प्रदेश छोटे उद्योगों का बड़ा केंद्र बन चुका है और युवाओं के लिए तेजी से रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है।

ठोस नीतियों से छोटे उद्योगों को मिली रफ्तार

पिछले आठ वर्षों में योगी सरकार ने एमएसएमई सेक्टर को मजबूत आधार प्रदान किया है। उत्तर प्रदेश माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज प्रमोशन पॉलिसी-2022 के तहत—

  • पिछड़े क्षेत्रों में 10 से 25 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी,
  • एससी-एसटी और महिला उद्यमियों को अतिरिक्त लाभ दिए जा रहे हैं।
  • निवेश मित्र पोर्टल और सिंगल विंडो सिस्टम ने अनुमोदन प्रक्रियाओं को काफी सरल बना दिया है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से तेज हुई निवेश प्रक्रिया

निवेश मित्र और एमएसएमई वन कनेक्ट पोर्टल के माध्यम से उद्योग स्थापना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गई है। अब तक—

  • 19 लाख से अधिक लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं,
  • जीईडी प्रमाणन और पीएमईजीपी आवेदन की प्रक्रिया सरल हुई है।
  • वित्तीय वर्ष 2025 में एमएसएमई सेक्टर को लगभग 2.48 लाख करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे निवेश में बड़ा उछाल आया है।

महिला उद्यमियों और युवाओं को मिल रहा विशेष प्रोत्साहन

  • प्रदेश सरकार महिलाओं और युवाओं को उद्यमिता की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है।
  • मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत युवाओं को लगभग 1200 करोड़ रुपये की ऋण सब्सिडी दी जा चुकी है।
  • विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) के जरिए पारंपरिक कारीगरों को बढ़ावा मिल रहा है।
  • प्रदेश सरकार ने एमएसएमई से 25 प्रतिशत सरकारी खरीद अनिवार्य की है, जिसमें महिलाओं के लिए 3 प्रतिशत, और एससी-एसटी इकाइयों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण तय किया गया है।

कृषि और तकनीकी उद्योगों को मिल रही नई दिशा

  • प्रदेश में कृषि और तकनीकी आधारित छोटे उद्योगों का तेजी से विस्तार हो रहा है।
  • लखनऊ और कानपुर में इनोवेशन हब्स,
  • ड्रोन निगरानी, और एआई आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • विकसित यूपी-2047 विजन के तहत 33 क्षेत्रीय नीतियां सीधे तौर पर एमएसएमई सेक्टर को लक्षित करती हैं।

ग्रामीण रोजगार और अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा

इन सभी प्रयासों से एमएसएमई सेक्टर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये का योगदान दे रहा है और ग्रामीण स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश विकसित भारत का मजबूत स्तंभ बनता जा रहा है और छोटे उद्योग अब राज्य की प्रगति का इंजन बन चुके हैं।

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