महिला शक्ति का उदाहरण: सशक्त मानसिकता से पोषण निर्माण में आगे बढ़ता सूरजपुर
सूरजपुर जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित पोषण आहार संयंत्रों से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आहार मिल रहा है। यह पहल पोषण सुधार के साथ महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दे रही है।

रायपुर. आर्थिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव सशक्त मानसिकता पर टिकी होती है। दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास व्यक्ति को सफलता की ओर अग्रसर करते हैं। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला में स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने इस सोच को साकार कर आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल पेश की है। ये महिलाएं न केवल स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, बल्कि जिले की महिलाओं एवं बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के अभियान में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।
पोषण और महिला सशक्तिकरण—दोनों का साथ
रेडी-टू-ईट (RTE) पोषण आहार निर्माण संयंत्र सरकार द्वारा संचालित ऐसी इकाइयाँ हैं, जिन्हें महिला स्व-सहायता समूह संचालित करती हैं। इन संयंत्रों के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्र के जरिए बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरी बालिकाओं को पौष्टिक, पहले से तैयार भोजन उपलब्ध कराया जाता है। गेहूं, दाल और दूध जैसे पोषक तत्वों से भरपूर घटकों से तैयार यह आहार प्रोटीन एवं आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत है।
नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार का निर्माण
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण संयंत्र प्रारंभ किए गए हैं। इन संयंत्रों में स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार किया जा रहा है। यह आहार विटामिन ‘ए’, ‘डी’, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, पाइरीडॉक्सिन, फोलिक अम्ल, कोबालामिन, आयरन, कैल्शियम और जिंक जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर है।
तीन संयंत्रों में 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत
जिला प्रशासन द्वारा कुल 07 पोषण आहार निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में भैयाथान, प्रतापपुर एवं सूरजपुर विकासखंड में तीन संयंत्रों का सफल संचालन हो रहा है, जहां 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से पोषण आहार निर्माण कार्य में संलग्न हैं। निर्मित आहार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को निःशुल्क वितरित किया जा रहा है।
430 महिलाएं वितरण व्यवस्था में सक्रिय
भैयाथान विकासखंड में 15, सूरजपुर विकासखंड में 15 तथा प्रतापपुर विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूह वितरण कार्य में सक्रिय हैं। इन समूहों के माध्यम से कुल 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं और महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ आजीविका से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।




