देश

सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल: ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, बताइए उपाय—किसे दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत कक्ष में अनुशासन भंग की घटनाओं पर सख्ती दिखाते हुए केंद्र और SCBA से रोकथाम के उपाय व मीडिया रिपोर्टिंग के लिए SOP पर संयुक्त सुझाव मांगे।

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) से अदालत कक्ष में अनुशासन भंग करने की घटनाओं—जैसे पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई पर जूता फेंकने के प्रयास—की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस उपाय सुझाने को कहा। शीर्ष अदालत ने ऐसी घटनाओं की मीडिया रिपोर्टिंग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने पर भी सुझाव मांगे हैं।

केंद्र और SCBA से संयुक्त दिशानिर्देश का आग्रह

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता व SCBA अध्यक्ष विकास सिंह से इस संबंध में संयुक्त सुझाव दाखिल करने को कहा।

सीजेआई ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल और SCBA अध्यक्ष ने संयुक्त रूप से आश्वस्त किया है कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम और उनके रिपोर्टिंग/प्रसारण के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर साझा प्रस्ताव पेश करेंगे।

औपचारिक नोटिस से छूट, संयुक्त सुझाव दाखिल होंगे

अदालत ने केंद्र को औपचारिक नोटिस जारी करने की प्रक्रिया से छूट देते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला प्रतिद्वंद्वी प्रकृति का नहीं है। इसलिए, दोनों पक्ष संयुक्त रूप से सुझाव दाखिल कर सकते हैं।

अवमानना पर रुख और पृष्ठभूमि

इससे पहले पीठ ने 71 वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने को लेकर अनिच्छा जताई थी। उल्लेखनीय है कि 6 अक्टूबर को अदालती कार्यवाही के दौरान किशोर ने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई की ओर जूता फेंकने का प्रयास किया था। अदालत ने कहा था कि जो भी आवश्यक होगा, उस पर विचार किया जाएगा।

अखिल भारतीय दिशानिर्देशों पर विचार

न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने 12 नवंबर को SCBA की ओर से उपस्थित वकीलों से सुझाव मांगे थे और कहा था कि अदालत इस विषय पर अखिल भारतीय दिशानिर्देश तैयार करने पर विचार कर रही है। उन्होंने आग्रह किया था कि अदालत परिसर और बार कक्ष जैसे स्थानों पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तीन-चार व्यावहारिक सुझाव दिए जाएं।

लाइसेंस निलंबन और व्यापक निंदा

घटना के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने अधिवक्ता राकेश किशोर का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इस कृत्य की व्यापक निंदा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना की निंदा करते हुए प्रधान न्यायाधीश से बात की थी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button