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अब लापरवाही नहीं चलेगी: 145 मौतों के बाद स्लीपर कोच बसों के लिए सख्त नियम लागू

स्लीपर बस हादसों में 6 महीने में 145 मौतों के बाद केंद्र सरकार का बड़ा फैसला। अब केवल मान्यता प्राप्त कंपनियां बनाएंगी स्लीपर बस, AIS-052 कोड और नए सेफ्टी फीचर्स अनिवार्य।

नई दिल्ली. पिछले छह महीनों में देशभर में स्लीपर कोच बसों की अलग-अलग दुर्घटनाओं और आग की घटनाओं में करीब 145 लोगों की मौत के बाद केंद्र सरकार ने यात्री सुरक्षा को लेकर कड़े नियम लागू कर दिए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की कि अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियां या निर्माता ही कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य लंबी दूरी की यात्रा को अधिक सुरक्षित और मानकीकृत बनाना है, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

लोकल बॉडी बिल्डर्स पर रोक

नए नियमों के तहत स्थानीय और मैन्युअल बॉडी बिल्डर्स को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का मानना है कि ट्रैवल एजेंसियां अक्सर लोकल बॉडी मेकर्स से मनचाहे बदलाव कराती हैं, जिससे सेफ्टी स्टैंडर्ड से समझौता होता है। अब यह प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित और प्रमाणित होगी।

मौजूदा स्लीपर बसों में भी अनिवार्य होंगे सेफ्टी फीचर्स

केंद्र सरकार ने देश में चल रही सभी मौजूदा स्लीपर बसों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन्हें अनिवार्य रूप से आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस करना होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में जान-माल का नुकसान रोका जा सके।

अनिवार्य सेफ्टी फीचर्स

  • फायर डिटेक्शन सिस्टम
  • इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम
  • ड्राइवर की नींद का अलर्ट सिस्टम
  • एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS)
  • इमरजेंसी एग्जिट और सेफ्टी हैमर

AIS-052 और नए बस बॉडी कोड का पालन जरूरी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी स्लीपर बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड और मॉडिफाइड बस बॉडी कोड का पालन करना होगा। यह संशोधित कोड 1 सितंबर 2025 से लागू हो चुका है। जो बसें इन मानकों पर खरी नहीं उतरेंगी, उन्हें सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं मिलेगी।

क्या है AIS-052 बस बॉडी कोड

AIS-052 (ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड-052) भारत का आधिकारिक बस बॉडी डिजाइन और सेफ्टी कोड है। इसमें बस के स्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और यात्री सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी मानक तय किए गए हैं। फैक्ट्री-मेड हो या कोच-बिल्ट—रजिस्ट्रेशन और संचालन से पहले इन नियमों का पालन अनिवार्य है। यह मानक केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है।

सरकार का दावा

सरकार का कहना है कि इन सख्त कदमों से स्लीपर बस सेवाओं की गुणवत्ता, भरोसा और सुरक्षा स्तर में बड़ा सुधार होगा और भविष्य में यात्रियों की जान जोखिम में नहीं पड़ेगी।

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