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नए साल की सुस्त शुरुआत: 4% फिसला बाजार, एफपीआई की बड़ी बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह 2.5% से ज्यादा की गिरावट आई। सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में रहे, रियल्टी सेक्टर 11% से ज्यादा टूटा, एफपीआई की बिकवाली जारी।

मुंबई. इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंताओं के कारण बाजार दबाव में रहा। सप्ताह के दौरान सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।

सेंसेक्स और निफ्टी का हाल

हफ्ते के दौरान निफ्टी 50 में 2.51 प्रतिशत की गिरावट आई और अंतिम कारोबारी दिन यह 0.95 प्रतिशत फिसलकर 25,048 पर बंद हुआ। वहीं बीएसई सेंसेक्स अंतिम दिन 769 अंक (0.94%) टूटकर 81,537 पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स 2.43 प्रतिशत नीचे रहा।

रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा टूटा

सभी सेक्टोरल इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जिसमें 11.33 प्रतिशत की तेज गिरावट आई। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, टेलीकॉम और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टर में भी 5 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखने को मिली।

मिडकैप और स्मॉलकैप पर ज्यादा दबाव

  • बाजार में गिरावट का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर ज्यादा दिखा।
  • निफ्टी मिडकैप 100: 4.58% की गिरावट
  • निफ्टी स्मॉलकैप 100: 5.81% की गिरावट

बैंक निफ्टी अहम सपोर्ट के नीचे

बैंक निफ्टी भी कमजोर रहा और यह 58,800 के अहम सपोर्ट लेवल से नीचे फिसल गया, जिससे बाजार में नकारात्मक संकेत मजबूत हुए।

वैश्विक कारणों से बिगड़ी निवेशकों की धारणा

विशेषज्ञों के अनुसार, हफ्ते की शुरुआत में कुछ आईटी और बैंकिंग कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों से बाजार को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन बाद में कई कंपनियों के कमजोर नतीजों ने निवेशकों की धारणा फिर कमजोर कर दी। दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड और टैरिफ को लेकर दिए गए सख्त बयानों ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर किया, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।

एफपीआई की बिकवाली और कमजोर रुपया

1 जनवरी 2026 से अब तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। इस अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) करीब 36,500 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। इस बीच भारतीय रुपया भी कमजोर होकर लगभग 92 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के पास पहुंच गया है, जिससे आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ी है।

आगे क्या देख रहे हैं निवेशक

निवेशक अब केंद्रीय बजट 2026 और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट से पहले बाजार में सीमित समय के लिए तेजी की छोटी लहर दिख सकती है, क्योंकि कई विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजिशन पहले से बनी हुई है। हालांकि, स्थायी सुधार तभी संभव है जब वैश्विक हालात सुधरें, कंपनियों के नतीजे मजबूत हों और बजट से निवेशकों को भरोसा मिले।

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