निवेशकों की पूंजी घटी: ट्रंप टैरिफ का असर, 5 दिन में 2200 अंक लुढ़का सेंसेक्स
शेयर बाजार में भारी गिरावट: 5 दिन में सेंसेक्स 2200 अंक टूटा, निवेशकों के 13 लाख करोड़ रुपये डूबे। जानिए अमेरिकी टैरिफ, विदेशी बिकवाली और तेल कीमतों का असर।

भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता कारोबारी सप्ताह बेहद खराब रहा। सोमवार से शुक्रवार तक लगातार बिकवाली के चलते सेंसेक्स करीब 2200 अंक टूट गया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 604 अंक गिरकर 83,576 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 193 अंक फिसलकर 25,683 के स्तर पर बंद हुआ। बैंकिंग शेयरों में भी भारी दबाव देखने को मिला और निफ्टी बैंक 435 अंक टूट गया।
टॉप शेयरों में बिकवाली का दबाव
BSE के टॉप-30 शेयरों में से 21 शेयर लाल निशान पर बंद हुए, जबकि सिर्फ 9 शेयरों में बढ़त रही। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 2186 अंक गिर चुका है, वहीं NSE निफ्टी में करीब 2.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
5 दिन में 13 लाख करोड़ रुपये साफ
लगातार गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा है। बीएसई के मार्केट कैप के आधार पर निवेशकों की संपत्ति पिछले सत्र के 472.25 लाख करोड़ रुपये से घटकर 467.87 लाख करोड़ रुपये रह गई।
सिर्फ एक सत्र में 4.38 लाख करोड़ रुपये और बीते पांच दिनों में कुल 13.37 लाख करोड़ रुपये की पूंजी बाजार से साफ हो चुकी है। मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स भी इस बिकवाली से अछूते नहीं रहे।
क्यों आई भारतीय शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट?
अमेरिकी टैरिफ का खतरा: अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के बयान के बाद बाजार में घबराहट बढ़ी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल खरीदने वाले भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने गिरावट को और गहरा किया। 8 जनवरी को ही विदेशी निवेशकों ने 3,367.12 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेच डाले।
ग्लोबल बाजारों से नेगेटिव संकेत: एशियाई बाजारों में कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता ने भारतीय इक्विटी में सतर्कता बढ़ा दी है। इसके अलावा भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला: डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से जुड़े मामले पर आज अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में फैसला आने वाला है। इससे यह तय होगा कि दूसरे देशों पर टैरिफ लगाना कितना वैध है, जिसका असर सीधे वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत की आयात पर भारी निर्भरता के कारण यह भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।




