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आंख फड़की और बढ़ी धड़कन? जानें यह शुभ है या अशुभ

आंखों का फड़कना शुभ है या अशुभ? सामुद्रिक शास्त्र में पुरुषों और महिलाओं की दाईं-बाईं आंख फड़कने के अलग-अलग संकेत बताए गए हैं। जानिए इसका पूरा अर्थ।

सामुद्रिक शास्त्र प्राचीन भारतीय विद्याओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस शास्त्र में व्यक्ति के शरीर की बनावट, अंगों की संरचना और उनकी गतिविधियों के आधार पर जीवन में घटित होने वाली घटनाओं के संकेत बताए गए हैं। शरीर के किसी अंग का बार-बार फड़कना आमतौर पर एक शारीरिक क्रिया माना जाता है, लेकिन सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यह आने वाले समय का संकेत या चेतावनी भी हो सकता है।

सामुद्रिक शास्त्र क्या कहता है अंगों की फड़कन के बारे में

सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि शरीर के कुछ अंगों का फड़कना शुभ और लाभकारी होता है, जबकि कुछ अंगों की फड़कन अशुभ और नुकसान का संकेत देती है। इनमें सबसे अधिक चर्चा आंखों के फड़कने को लेकर होती है, क्योंकि यह तुरंत महसूस होता है और इसके अर्थ भी गहरे माने जाते हैं।

पुरुषों की दाईं आंख फड़कना माना जाता है शुभ

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार—

  • पुरुषों की दाईं आंख का फड़कना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • यह संकेत देता है कि जीवन में खुशखबरी मिलने वाली है।
  • लंबे समय से अटका हुआ काम पूरा हो सकता है।
  • करियर, व्यापार या व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव के योग बनते हैं।
  • हालांकि, महिलाओं के लिए यही संकेत अलग अर्थ रखता है।

महिलाओं की बाईं आंख फड़कना है शुभ संकेत

सामुद्रिक शास्त्र में महिलाओं के लिए—

  • बाईं आंख का फड़कना शुभ माना गया है।
  • यह धन लाभ, रुका हुआ पैसा मिलने या नौकरी में प्रमोशन का संकेत हो सकता है।
  • घर में खुशखबरी, पारिवारिक सुख या संतान सुख के योग भी इससे जुड़े माने जाते हैं।
  • इसके विपरीत, महिलाओं की दाईं आंख का फड़कना शुभ नहीं माना जाता।

पुरुषों और महिलाओं के लिए कौन-सा संकेत है अशुभ

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार—

  • पुरुषों की बाईं आंख का फड़कना
  • महिलाओं की दाईं आंख का फड़कना
  • इन दोनों स्थितियों को अशुभ माना गया है। यह जीवन में—
  • संघर्ष
  • मानसिक तनाव
  • आर्थिक या पारिवारिक परेशानियों की ओर इशारा कर सकता है।

संकेतों को समझना जरूरी

हालांकि सामुद्रिक शास्त्र इन संकेतों को भविष्य से जोड़ता है, लेकिन विद्वानों का मानना है कि किसी भी संकेत को अंधविश्वास की बजाय संतुलित दृष्टिकोण से देखना चाहिए। शारीरिक कारणों से भी आंखों का फड़कना हो सकता है, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना भी जरूरी है।

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