ऊर्जा सुरक्षा की मिसाल: पेंच जल विद्युत गृह ने ताप विद्युत गृहों को संभाला
पेंच जल विद्युत गृह में MP Power Generation और MahaTransco की सफल ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल। आपात स्थिति में महाराष्ट्र को 5,000 मेगावाट का बैकअप, ग्रिड बहाली का अभ्यास।

भोपाल. मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने पेंच जल विद्युत गृह, तोतलाडोह के माध्यम से उच्च स्तरीय अभियान्त्रिकी दक्षता और परिचालन तत्परता का प्रदर्शन करते हुए महाराष्ट्र राज्य विद्युत पारेषण कंपनी के साथ एक सफल ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल का आयोजन किया। यह अभ्यास राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के आंशिक अथवा पूर्ण विफल होने की स्थिति में त्वरित विद्युत बहाली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया।
5,000 मेगावाट उत्पादन क्षमता को दिया गया बैकअप
इस मॉक ड्रिल के अंतर्गत पेंच जल विद्युत गृह से महाराष्ट्र के कोराडी ताप विद्युत गृह, खापरखेड़ा ताप विद्युत गृह (महा-जेनको) और विदर्भ औद्योगिक विद्युत गृह (अदाणी समूह) तक एक आयलैंड का निर्माण किया गया। इस आयलैंड के माध्यम से महाराष्ट्र राज्य की लगभग 5,000 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता को आपातकालीन बैकअप प्रदान किया गया।
क्यों की जाती है ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल
भारतीय विद्युत ग्रिड संहिता (IEGC) और MEGC–2020 के प्रावधानों के अनुसार ग्रिड पुनर्बहाली प्रक्रियाओं का समय-समय पर परीक्षण अनिवार्य है। इसमें पूर्ण या आंशिक ब्लैकआउट की स्थिति में—
- ब्लैक स्टार्ट प्रक्रिया
- आयलैंड का निर्माण
- आयलैंड को पुनः राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ना
- जैसे महत्वपूर्ण चरणों का व्यावहारिक परीक्षण किया जाता है।
21 जनवरी को हुआ अभ्यास, दो घंटे तक चला आयलैंड ऑपरेशन
- यह ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल 21 जनवरी को सुबह 10:03 बजे से 12:02 बजे तक सफलतापूर्वक संचालित की गई।
- इस दौरान पेंच जल विद्युत गृह से लगभग 20 मेगावाट विद्युत की आपूर्ति महाराष्ट्र के तीनों ताप विद्युत गृहों को की गई।
- करीब दो घंटे तक आयलैंड के स्थिर संचालन के बाद पेंच जल विद्युत गृह को राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के साथ पुनः समन्वित (री-सिंक्रोनाइज) किया गया। पूरी प्रक्रिया निर्धारित तकनीकी मानकों और समय-सीमा के अनुरूप संपन्न हुई।
क्या होती है ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल
ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल एक विशेष तकनीकी अभ्यास है, जिसमें किसी विद्युत गृह को बाहरी ग्रिड सहायता के बिना प्रारंभ किया जाता है। सामान्यतः यह प्रक्रिया जल या गैस आधारित विद्युत गृहों द्वारा की जाती है, जहां—
- डीजल जनरेटर जैसे स्टैंड-अलोन स्रोतों से सहायक प्रणालियों को ऊर्जा दी जाती है
- इसके बाद क्रमशः ताप विद्युत इकाइयों को चालू किया जाता है
- यह अभ्यास प्रणाली की विश्वसनीयता और अभियंताओं की तकनीकी तत्परता का महत्वपूर्ण परीक्षण माना जाता है।
सेंट्रल इंडिया के लिए पेंच जल विद्युत गृह की अहम भूमिका
उल्लेखनीय है कि सेंट्रल इंडिया और विदर्भ क्षेत्र के निकट उपलब्ध 160 मेगावाट क्षमता का पेंच जल विद्युत गृह एकमात्र प्रमुख जल विद्युत स्रोत है।
पूर्व में हुई ग्रिड संबंधी घटनाओं को देखते हुए ऐसे ब्लैक स्टार्ट सक्षम विद्युत गृहों की निरंतर तत्परता अत्यंत आवश्यक है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में विद्युत आपूर्ति शीघ्र बहाल कर आर्थिक और सामाजिक क्षति को न्यूनतम किया जा सके।




