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घर के पानी पर मंडराता खतरा, रिपोर्ट में बैक्टीरिया की पुष्टि

पटना में सरकारी प्रयोगशालाओं में मुफ्त जल जांच की सुविधा। 955 नमूनों में 20 दूषित पाए गए। जानिए कहां जांच कराएं, RO कैसे चुनें और BIS मानक।

पटना. लोक स्वास्थ्य संस्थान (PHI) के बैक्टीरियोलॉजी विभाग स्थित जल जांच प्रयोगशाला में पिछले वर्ष रेलवे के 743 और आमजन के 212 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 20 नमूनों में हैजा, टायफॉयड, हेपेटाइटिस A/E, अमीबायसिस, जियार्डियासिस, डायरिया और फ्लोरोसिस जैसे रोगों के कारक बैक्टीरिया पाए गए। यह जानकारी लोक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने दी।

पीने के पानी की मुफ्त जांच—सरकारी व्यवस्था

यदि आप अपने घर के पेयजल की गुणवत्ता जानना चाहते हैं, तो सरकारी प्रयोगशालाओं में निशुल्क जांच कराई जा सकती है। जिले में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) हर अनुमंडल, जिला और राज्य स्तर पर जल जांच प्रयोगशालाएं संचालित कर रहा है।

डॉ. सिंह के अनुसार, आवेदन मिलने पर PHI की टीम एक दिन में चार स्थानों से नमूने लेकर मुफ्त जांच करती है। रिपोर्ट संबंधित व्यक्ति/संस्थान को दी जाती है और जल उपचार के उपाय भी सुझाए जाते हैं।

कितनी और कहां-कहां प्रयोगशालाएं

  • 1 राज्यस्तरीय, 38 जिला स्तरीय और 75 अनुमंडलीय जल जांच प्रयोगशालाएं
  • जिलास्तरीय प्रयोगशाला: 300 नमूने/माह
  • अनुमंडलीय प्रयोगशाला: 125 नमूने/माह
  • 15 जिलों की प्रयोगशालाएं नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (NABL) प्रमाणित
  • सरकार का वार्षिक खर्च: ₹62.32 लाख (केवल जल जांच पर)

सप्लाई का पानी मानकों पर खरा—PHED

PHED (पूर्वी) के कार्यकारी अभियंता कुमार अभिषेक के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल का जल योजना के तहत आपूर्ति किए जा रहे पानी की हर तीन माह में भौतिक, रासायनिक और बैक्टीरियल/वायरल जांच होती है। अब तक आपूर्ति जल सभी मानकों पर खरा उतरा है।

कहां कराएं जांच (पटना)

  • रेडियो स्टेशन के पीछे राज्यस्तरीय जल जांच प्रयोगशाला
  • राजवंशी नगर, ऊर्जा ऑडिटोरियम के पास जिला जल जांच प्रयोगशाला
  • अपने अनुमंडल की प्रयोगशाला (चापाकल, कुआं, बोरिंग, नल का पानी)
  • नोट: नगर निगम के पास अपनी अलग जल जांच प्रयोगशाला नहीं है; हाल में नमूने PHED की प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं।

प्रयोगशाला में उपलब्ध जांच

  • रंग–गंध, pH, क्लोरीन
  • क्षारीयता, खारापन, क्लोराइड
  • फ्लोराइड, आयरन, सल्फेट, नाइट्रेट
  • आर्सेनिक
  • E. coli / कोलिफॉर्म व थर्मो-टॉलरेंट कोलिफॉर्म
  • NABL प्रमाणित प्रयोगशालाओं में जांच BIS IS-10500 मानक के अनुसार होती है।

RO चुनने से पहले ये जांच जरूर कराएं

  • राज्य जल जांच प्रयोगशाला के वरिष्ठ विश्लेषक प्रवीण कुमार के अनुसार, बिना जांच के RO लगवाना सही नहीं।
  • आयरन ज्यादा: आयरन रिमूवर (RO नहीं)
  • आर्सेनिक/फ्लोराइड ज्यादा: RO–UF + मिनरल कार्ट्रिज
  • TDS < 300 लेकिन बैक्टीरिया: UV + UF
  • सब कुछ मानक से ज्यादा: आर्सेनिक–फ्लोराइड सर्टिफाइड कम्प्लीट RO सिस्टम

पेयजल के प्रमुख मानक (BIS IS-10500)

  • रंगहीन, गंधहीन, प्राकृतिक स्वाद
  • pH: 6.5–8.5
  • TDS: < 500 mg/L
  • कठोरता/क्षारीयता: < 250 mg/L
  • सल्फेट: < 200 mg/L | क्लोराइड: < 250 mg/L
  • नाइट्रेट: < 45 mg/L
  • फ्लोराइड: 1–1.5 mg/L
  • आयरन: < 0.3 mg/L
  • आर्सेनिक/लेड: < 0.01 mg/L
  • E. coli/टोटल कोलिफॉर्म: शून्य
  • कीटनाशक, मरकरी, कैडमियम, फिनॉल, साइनाइड—जांच जरूरी

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